आम लोगों की सुविधा के लिए दिल्ली पुलिस ने हफ्तेभर पहले ही वॉट्सऐप सेवा लॉन्च की थी। उन्हें भी इस बात का अंदाजा नहीं रहा होगा कि इस ऐप की गाज सबसे पहले दिल्ली पुलिस पर ही गिरेगी। ऐप लॉन्च होने के एक हफ्ते के भीतर ही पांच पुलिस वाले घूस लेने के आरोप में पकड़े जा चुके हैं।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार दिल्ली पुलिस के सतर्कता विभाग ने इन आरोपी पुलिसवालों को तब पकड़ा जब कुछ आम नागरिकों ने इन घूसखोरों की वीडियो बनाकर इन्हें दिल्ली पुलिस के बताए वॉट्सऐप नंबर पर भेजा, जिसमें ये रिश्वत लेते दिखाई दे रहे हैं।
जांच में सभी वीडियो असली पाए गए
पुलिस के अनुसार उन्हें वॉट्सऐप के नंबर 9910641064 पर दो वीडियो और एक ऑडियो क्लिप मिली है। इन सभी में पुलिसवाले रिश्वत मांगते और लेते पाए गए हैं।
डीसीपी सिंधु पिल्लई के अनुसार, पुलिस ने इन क्लिप्स के मिलने के बाद इनकी सच्चाई का पता लगाने के लिए एक टीम बनाई।
टीम की जांच में ये सभी वीडियो फुटेज असली साबित हुए और आरोपी पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
एएसआई की आवाज की रिकॉर्ड
पहले वीडियो फुटेज में हिम्मत गढ़ में तैनात एएसआई को पुलिस वेरिफिकेशन फॉर्म को क्लियर करने के लिए पैसे मांगते दिखाया गया है। इस घटना के बाद शिकायतकर्ता ने सतर्कता विभाग को इस बारे में लिखित शिकायत भी दी थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार हौज काजी पुलिस स्टेशन के एएसआई तुकी सिंह ने 400 रुपए लिए थे। शिकायतकर्ता ने एएसआई को घूस देते वक्त की बातचीत रिकॉर्ड कर ली थी।
दूसरी घटना में शिकायतकर्ता ने 6 ऑडियो रिकॉर्डिंग भेजी है, जिसमें कुछ पुलिसवाले शिकायतकर्ता से पश्चिमी दिल्ली के रंजीत नगर में एक दुकान चलाने के लिए घूस मांग रहे हैं।
शिकायतकर्ता ने इन सभी बातों को अपने मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड कर लिया था। रिकॉर्डिंग में ये सामने आया है कि कांस्टेबल संतराम ने शिकायतकर्ता के कर्मचारी से 1000 रुपए मांगे थे, जबकि उनकी डील 800 रुपए में हुई।
दिल्ली पुलिस का काला चेहरा वाट्स से सामने आया
सतर्कता विभाग ने पांच में से दो अफसरों को विडियो क्लिप के जरिए पकड़ा और घूस लेने की बात उन्होंने पूछताछ के दौरान कबूल भी कर ली।
तीन और पुलिसवाले जिनकी पहचान हेड कांस्टेबल कुलदीप त्यागी, कांस्टेबल बिजेंदर और कांस्टेबल रवि के रूप में हुई, उन्हें भी पुलिस ने रिकॉर्ड की हुई बातचीत के आधार पर गिरफ्तार किया।
त्यागी 25000 रुपए रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया जबकि बिजेंदर और रवि को क्रमशः 300 और 500 मासिक रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। ये दोनों पैसे लेकर एक व्यापारी को उसका गोडाउन चलाने देते थे।