भारतीय पोलो एसोसिएशन ने अपनी अपील में बेदखली का किया है विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 15.20 एकड़ के जयपुर पोलो ग्राउंड पर कब्जा लिए जाने के बाद अब उस कार्रवाई पर स्टे आदेश नहीं दिया जा सकता। वेकेशन बेंच के न्यायमूर्ति विनोद कुमार ने यह मौखिक टिप्पणी भारतीय पोलो एसोसिएशन (आईपीए) की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। आईपीए ने सेशंस कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उसे अंतरिम राहत देने से इन्कार किया गया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सेशंस कोर्ट का विस्तृत आदेश अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए मामले को 1 जुलाई को नियमित रोस्टर बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि एक बार संबंधित अधिकारियों द्वारा भूमि पर कब्जा ले लेने के बाद यथास्थिति बनाए रखने या स्टे देने का प्रश्न नहीं उठता।
आईपीए ने अपनी अपील में रेस कोर्स क्षेत्र स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड से बेदखली का विरोध किया है। एसोसिएशन का कहना है कि कब्जे की प्रक्रिया के दौरान मैदान की घास (टर्फ) खोदी जा रही है, जिससे पोलो मैदान को स्थायी नुकसान पहुंच रहा है। उसके अनुसार टर्फ पोलो खेल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी क्षति से भविष्य में मैदान का उपयोग प्रभावित हो सकता है।