अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय और सेंट स्टीफंस कॉलेज के बीच नए प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराने लगा है। सेंट स्टीफंस कॉलेज ने डीयू से पिछले महीने जारी उस पत्र को वापस लेने की मांग की है, जिसमें विश्वविद्यालय ने कॉलेज की नई प्राचार्य सुसान एलियास की नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी और कॉलेज को आगे की प्रक्रिया रोकने के लिए कहा था।
कॉलेज की ओर से डीयू के कुलसचिव को पत्र लिखकर उस पत्र को वापस लेने का अनुरोध किया है, जिसमें विवि ने प्रिंसिपल की नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी। कॉलेज की ओर से कहा गया कि सेंट स्टीफंस एक संवैधानिक रूप से संरक्षित अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान है और उसे अपने प्राचार्य के चयन की प्रक्रिया निर्धारित करने का अधिकार प्राप्त है।
प्रो. सुसान एलियास का चयन कॉलेज की सुप्रीम काउंसिल ने 25 फरवरी को जारी विज्ञापन के आधार पर किया था। उन्हें 6 अप्रैल को नियुक्ति का प्रस्ताव दिया गया, जिसे उन्होंने उसी दिन स्वीकार कर लिया। प्रो. एलियास ने बीते एक जून को सेंट स्टीफंस कॉलेज में प्राचार्य का कार्यभार संभाल लिया था। कॉलेज की ओर से कहा जा रहा है कि एलियास विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करती हैं।
डीयू ने पिछले महीने कॉलेज को पत्र भेजकर नियुक्ति प्रक्रिया आगे न बढ़ाने को कहा था। विश्वविद्यालय का आरोप था कि चयन समिति का गठन यूजीसी विनियम 2018 के अनुरूप नहीं किया गया। डीयू का कहना था कि समिति में कुलपति का नामित प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ शामिल नहीं थे। इसके जवाब में कॉलेज ने तर्क दिया कि यूजीसी के यह नियम अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों पर लागू नहीं होते। कॉलेज ने यह भी कहा कि पूर्व प्राचार्यों वॉल्सन थम्पू और प्रो. जॉन वर्गीज की नियुक्तियां भी इसी प्रक्रिया के तहत हुई थीं, जिन पर डीयू ने कभी आपत्ति नहीं जताई। जबकि वर्गीज से जुड़ा विवाद केवल उनके कार्यकाल विस्तार को लेकर था, चयन प्रक्रिया को लेकर नहीं।