श्रीश्री रविशंकर महाराज ने श्रद्धालुओं को रुद्र पूजा का भावार्थ समझाते हुए कहा कि रुद्र का अर्थ है शिव, जो बुराई के संहारक हैं। पूजा शब्द दो भागों से मिलकर बना है।
पू पूर्णता के लिए है जिसका अर्थ है पूर्ण होना और जा का मतलब जन्म से है। चेतना पूर्ण होने के बाद की जाने वाली क्रिया को ही पूजा कहते हैं। या फिर जब हृदय पूर्ण उत्साह से भरा हो और इसी उत्साह के साथ कोई कृतज्ञता भरा कार्य किया जाता है तो उसे पूजा की संज्ञा दी जाती है।
उन्होंने यह ज्ञान सोमवार सुबह आर्ट ऑफ लिविंग संस्था की ओर से आयोजित रुद्र पूजा के दौरान दिया।
कविनगर रामलीला मैदान सुबह-सुबह हुई रुद्र पूजा के दौरान महामृत्युंजय और ऊं नम: शिवाय के मंत्रोच्चारण से गूंज उठा।
श्री श्री रविशंकर ने कहा कि रुद्र पूजा भगवान शिव की पूजा की एक प्राचीन क्रिया है जिसका भारतवर्ष में अज्ञात समय से ही चलन रहा है। पूजा का मुख्य उद्देश्य आंतरिक शांति और पूर्णता है।
उन्होंने कहा कि जब हम भगवान शिव की पूजा करते हैं तो जो नकारात्मक ऊर्जा हमारे चारों ओर होती है चाहे वह बीमारी के रूप में हो, अवसाद के रुप में हो।
पूजा के बाद यह परिवर्तित हो कर शांति, खुशहाली में बदल जाती है। सीडीओ विनोद कुमार यदुवंशी, देवव्रत, साक्षी बतरा, अनुराधा सिंह मौजूद रहे।