खेल सुविधाओं के अभाव में मेवात की प्रतिभाएं निखरने से पहले ही दम तोड़ देती हैं। जिसका ताजा उदाहरण हाल ही में मेवात की धरती पर हुए प्रदेश स्तरीय अखाड़ा प्रतियोगिता में स्पष्ट देखने को मिला।
इस प्रतियोगिता में जहां अन्य जिलों के पहलवानों ने खूब दम दिखाया, वहीं मेवात के पहलवान उनके आसपास भी फटकते दिखाई नहीं दिए। इस सब के पीछे मेवात में खेल प्रतिभाओं के अनुकूल माहौल न बन पाना एक बड़ा कारण हैं। ऐसा नहीं है कि यहां प्रतिभाएं नहीं हैं, लेकिन सही मार्गदर्शन, उचित साधन व सुविधाओं के अभाव में वे निखर नहीं पातीं।
सुविधाओं के लिए तरस रहे खेल स्टेडियम : यहां खिलाड़ियों को सुविधा मिलना तो दूर करोड़ों की लागत से बने खंड स्तरीय राजीव गांधी खेल परिसर ही सुविधाओं के लिए मोहताज हैं। इन स्टेडियमों को लेकर पूर्व सरकार ने खूब प्रचार किया तो वर्तमान सरकार इनमें सुविधाएं उपलब्ध कराने के फिलहाल मूड में नहीं दिखाई दे रही है। करीब 5 वर्ष पहले बने इन स्टेडियमों में खिलाड़ियों के लिए कोच, बिजली-पानी, उपयुक्त मैदान के सहित अन्य क्या सुविधाएं है? इसके लिए न तो सरकार कोई प्रयास कर रही हैं और न ही वातानुकूलित कमरों में प्लानिंग करने वाले अधिकारी इस पर विचार कर रहे हैं। जिसके कारण ये स्टेडियम बिना रख-रखाव और प्रयोग के खंडहरों में तब्दील हो चुके हैं।
स्टेडियमों में उग रही झाड़: हालात ये हैं कि मेवात में बनाए गए खेल परिसरों में खिलाड़ियों की पौध तैयार होना दूर की बात, यहां तो जंगली घास, झाड, कीकरों की पौध तैयार हो रही हैं। मेवात में बनाए गए छह स्टेडियमों पर 3 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। मार्केटिंग बोर्ड द्वारा बनाए गए इन स्टेडियमों को 2011 में खेल विभाग को सौंप दिया गया था। लेकिन खेल विभाग इनके रखरखाव व खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए स्टेडियमों में आज तक कोई व्यवस्था नहीं कर पाया है।
जिला खेल अधिकारी गंगादत्त यादव का कहना है कि स्टेडियमों की मरम्मत के लिए पंचायती राज विभाग को पत्र लिखा हुआ है, लेकिन वहां से अभी कोई जवाब नहीं मिला हैं। ग्राऊंड मैनेजर लगाए गए थे, लेकिन कोर्ट केस की वजह से उन्हें हटा दिया गया है। कोटा खंडेवला में वालीबाल, झामूवास में एथलेटिक्स और नगीना में बाक्सिंग कोच तैनात हैं। जिले में करीब 20 कोचों की जरूरत है, लेकिन उनके पास केवल 8 कोच ही मौजूद हैं।
स्टेडियम==================लागत
- नगीना===================47 लाख
- पिनगवां =================54 लाख
- कामेडा==================51 लाख
- सिरौली==================57 लाख
- कोटा खंडेवला==============55 लाख
- झामूवास=================64 लाख