3600 करोड़ के वीवीआईपी चॉपर डील घोटाला मामले में पूर्व वायुसेना अध्यक्ष एसपी त्यागी की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही। सीबीआई ने कोर्ट को बताया है कि फरवरी 2005 में फिनमेकेनिका के जनरल मैनेजर (जीएम) भारत आए थे और एसपी त्यागी से मिले थे। इस दौरान दोनों के बीच हेलीकॉप्टर की उड़ान क्षमता के विषय में विचार-विमर्श हुआ था।
पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष सीबीआई जज अरविंद कुमार ने सीबीआई व बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद शशिंदर पाल त्यागी, संजीव त्यागी उर्फ जूली त्यागी व वकील गौतम खेतान से पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड तीन दिन के लिए बढ़ा दी। सीबीआई ने सात दिन की रिमांड मांगते हुए कहा कि यह विदेशों से घूस लेने का मामला है, जिसमें कई विदेशी आरोपी व कंपनियां शामिल हैं।
पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है। एजेंसी ने कहा कि मामले की जांच चार साल से चल रही है। इसमें मॉरीशस, दुबई, यूके व स्विटजरलैंड की सरकारों से मदद मांगी गई थी। मॉरीशस से करीब सवा लाख दस्तावेज मिले हैं। इससे पहले इटली, स्विटजरलैंड व यूके से मिले दस्तावेजों में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे, जिनकी छानबीन के लिए आरोपियों से पूछताछ करनी होगी।
‘सैन्य दस्तावेज दलालों को सौंपे’
कोर्ट के पूछने पर सीबीआई ने बताया कि पिछले चार दिनों के रिमांड में एसपी त्यागी से विदेशी से मिले दस्तावेजों, हेलीकॉप्टर खरीद के मानकों व संचालन अनिवार्यताओं (ओआर) में परिवर्तन के संबंध में पूछताछ की गई है। एजेंसी ने यह भी कहा कि अगस्ता वेस्टलैंड हेशके की मां के घर छापेमारी में संशोधित ओआर मिली थी। इससे यह साबित होता है कि देश के गोपनीय सैन्य दस्तावेज विदेशी दलालों को सौंपे गए थे।
मुलाकात अपराध नहीं : बचाव पक्ष
पूर्व वायुसेना अध्यक्ष की ओर से बहस करते हुए अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि मामले की जांच तीन साल आठ महीने से चल रही है। सीबीआई जिन दस्तावेजों के बारे में कोर्ट को बता रही है, वह दस्तावेज उसके पास काफी पहले से हैं। एजेंसी के पास ऐसा कोई नया दस्तावेज नहीं है कि जिसकी पुष्टि के लिए उनके मुवक्किल से पूछताछ करने की जरूरत है। बचाव पक्ष की अधिवक्ता ने कहा कि फरवरी 2005 में इटली के राष्ट्रपति के साथ 600 लोगों का प्रतिनिधिमंडल भी आया था। इसमें फिनमेकेनिका के मैनेजर जापा भी आए थे और उन्होंने सरकार व सेना के कई अधिकारियों से मुलाकात की थी। इन मुलाकातों में कुछ भी छिपा हुआ या अपराध नहीं था। अधिवक्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ एफआईआर में भी कुछ नहीं है। इसमें केवल यह कहा गया है कि उन्हें कुछ पैसा मिला था। यह आरोप आधारहीन है।