पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और उनके साथ लद्दाख से आए 150 से अधिक लोगों को पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया। वांगचुक इसके बाद सभी के साथ बुधवार शाम राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देकर अनशन खत्म करने का एलान किया। उधर, वांगचुक की हिरासत के विरोध में बुधवार को लद्दाख बंद रहा।
वांगचुक ने बताया कि उन्होंने सरकार को ज्ञापन सौंपा है। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि आने वाले दिनों में उनकी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या गृह मंत्री से मुलाकात कराई जाएगी। वांगचुक ने कहा, हमने सरकार को सांविधानिक प्रावधानों के तहत लद्दाख की रक्षा के लिए एक ज्ञापन दिया है। संविधान की छठी अनुसूची है, जो स्थानीय लोगों को संसाधनों के संचालन और प्रबंधन का अधिकार देती है। हमने लद्दाख के लिए एक लोकतांत्रिक व्यवस्था की मांग की है और छठी अनुसूची भी उसका एक हिस्सा है। बैठक की तिथि की पुष्टि एक दो दिन में की जाएगी। वांगचुक ने कहा कि उन्हें आश्वासन दिया गया है कि लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत 15 दिनों के भीतर फिर से शुरू होगी।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बुधवार सुबह सोनम के कुछ समर्थक राजघाट पहुंच गए थे। बताया जा रहा है कि ये लोग यहां अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। इससे बुधवार शाम को राजघाट पर माहौल तनावपूर्ण हो गया था। पुलिस ने काफी समर्थकों को हिरासत में ले लिया था। इसके बाद पुलिस के समझाने पर सभी राजघाट से जाने को तैया हो गए। पुलिस ने सभी बुधवार शाम को रिहा कर दिया था।
इस दिन हिरासत में लिया था
दिल्ली पुलिस ने सोमवार रात सिंघू सीमा पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के आरोप में हिरासत में लिया। वह एक महीने पहले लेह से शुरू हुई दिल्ली चलो पदयात्रा का नेतृत्व कर रहे थे। इसका आयोजन लेह एपेक्स बॉडी ने किया था, जो कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ मिलकर पिछले चार वर्षों से लद्दाख को राज्य का दर्जा देने, संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन चला रही है।
हिरासत में लिए जाने के खिलाफ मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई। अदालत ने सुनवाई 3 अक्तूबर तय की है। याचिकाकर्ता के वकील ने मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ के समक्ष मामले को सूचीबद्ध करने के लिए उल्लेख किया।
वांगचुक और कई अन्य लोगों को कथित तौर पर लद्दाख के लिए छठी अनुसूची का दर्जा मांगने के लिए राजधानी की ओर मार्च करते समय दिल्ली सीमा पर हिरासत में लिया गया है।