फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi NCR News: अभी सफदरजंग में ही होगा सोनम वांगचुक का इलाज, हाईकोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट की तलब

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो की अपील पर व्यापक सुनवाई की। याचिका में सिंगल जज के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने की मांग ठुकरा दी गई थी। अदालत ने सोमवार को कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया, लेकिन अस्पताल से मेडिकल रिपोर्ट तलब कर ली है। साथ ही एम्स निदेशक और उपचार में शामिल मुख्य चिकित्सक को मंगलवार को अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने वांगचुक की पत्नी की ओर से बहस शुरू की। उन्होंने 16 जुलाई को इसी पीठ की ओर से पारित आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि वांगचुक होश में हैं, सजग हैं और स्वयं पत्र लिख रहे हैं। सिब्बल ने बताया कि 17 जुलाई को उनका पोटैशियम स्तर सामान्य था, लेकिन 18 जुलाई को बिना परिवार या वांगचुक से सलाह किए, कोई रिपोर्ट साझा किए, पुलिस बल का प्रयोग कर उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वांगचुक न तो गिरफ्तार हैं और न ही हिरासत में, इसलिए उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज का अधिकार है।
विज्ञापन

सिब्बल ने कहा कि इस घटना से विश्वास की कमी पैदा हुई है, क्योंकि परिवार के डॉक्टरों को भी मिलने नहीं दिया जा रहा। उन्होंने लिखित रूप में रिपोर्ट साझा करने की मांग की थी, लेकिन मना कर दिया गया। उन्होंने बताया कि वांगचुक ने चिकित्सकीय सलाह के विरुद्ध डिस्चार्ज (डीएएमए) के लिए आवेदन दिया है, ताकि डॉक्टरों पर कोई दोष न आए। सिब्बल ने संवैधानिक रूप से मान्य भूख हड़ताल को प्रदर्शन का वैध साधन बताते हुए कहा कि बिना कानूनी आधार के किसी की स्वायत्तता नहीं छीनी जा सकती। उन्होंने आत्ममरण से संबंधित न्यायिक पूर्ववृत्त और विभिन्न देशों की अदालतों के आदेशों का भी हवाला दिया।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की ओर से दलील देते हुए स्पष्ट किया कि यह आत्ममरण का मामला नहीं, बल्कि आत्महत्या या जानबूझकर स्वास्थ्य बिगाड़ने जैसी स्थिति को रोकने का है। उन्होंने कहा कि आत्महत्या अपराध नहीं है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में अगर वांगचुक की जान जाती है तो हजारों लोग प्रभावित होंगे। मेहता ने कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि प्रदर्शन स्थल पर उनकी सेहत और न बिगड़ने दी जाए, क्योंकि इससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट्स में कोई बड़ा अंतर नहीं है, परिवार को पहुंच दी जा रही है और बुलेटिन जारी किए जा रहे हैं। वांगचुक की असुविधा को देखते हुए एम्स का एक डॉक्टर स्थायी रूप से तैनात किया गया है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने मामले को मंगलवार दोपहर 12:30 बजे तक स्थगित कर दिया। अदालत ने सफदरजंग अस्पताल, एम्स और निजी प्रयोगशाला से वांगचुक के रक्त और मूत्र के नमूनों की सभी रिपोर्टें शपथ-पत्र सहित पेश करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पैथोलॉजिकल रिपोर्ट को हमेशा मरीज की नैदानिक स्थिति के साथ मिलाकर देखना चाहिए। कोर्ट ने किडनी पर तनाव की संभावना का भी जिक्र किया।
विज्ञापन

000000000

धरने की निगरानी पर भी याचिका पर आज सुनवाई
जेएनयू की पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष आईसी घोष की याचिका पर भी आज बहस हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि बारिश में भीगी हुई महिला प्रदर्शनकारियों के वीडियो बनाए जा रहे थे। सोते हुए प्रदर्शनकारियों के वीडियोग्राफी की गई। याचिकाकर्ता ने कहा कि हम जानवर नहीं है हम स्वतंत्र नागरिक है और अपने प्रदर्शन के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके जवाब में केंद्र सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह मंगलवार को वांगचुक की याचिका के साथ ही इस याचिका पर भी जवाब देंगे। जिसके बाद याचिका को मंगलवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें