स्वास्थ्य में भारी गिरावट, इलाज से इनकार
सफदरजंग अस्पताल के बुलेटिन के अनुसार, 59 वर्षीय सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह 7:40 बजे अस्पताल लाया गया था। भर्ती के समय वे होश में थे और उनका ब्लड प्रेशर व ऑक्सीजन का स्तर सामान्य था, लेकिन उनके शरीर में पानी की गंभीर कमी देखी गई। दोपहर 1 बजे तक उनके यूरिन में कीटोन का स्तर 1+ से बढ़कर 3+ तक पहुंच गया, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद चिंताजनक है। अस्पताल प्रशासन उनके परिजनों को लगातार समझा रहा है ताकि जल्द से जल्द इलाज शुरू किया जा सके।
पारदर्शिता पर पत्नी ने उठाए सवाल, डिस्चार्ज की मांग
इस बीच, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने अस्पताल प्रशासन और जांच रिपोर्ट की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि सफदरजंग अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक वांगचुक का पोटेशियम स्तर गिरकर 2.9 हो गया है, जबकि कल ही यह 4.3 था। अस्पताल प्रशासन हमें किसी अन्य लैब से सेकंड ओपिनियन (दूसरी राय) लेने की अनुमति नहीं दे रहा है, और न ही हमारे सामने ब्लड सैंपल दे रहा है ताकि हम बाहर जांच करा सकें। इस अपारदर्शिता के कारण हमें संदेह हो रहा है। हमने अस्पताल से तुरंत डिस्चार्ज की मांग की है ताकि हम अपनी पसंद के अस्पताल में उनका इलाज करा सकें, लेकिन पिछले दो घंटों से हमें कोई जवाब नहीं मिला है।
नीट विवाद को लेकर चल रहा था अनशन, विपक्ष लामबंद
सोनम वांगचुक नीट पेपर लीक विवाद और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर जंतर-मंतर पर बेमियादी भूख हड़ताल कर रहे थे। दिल्ली पुलिस का कहना है कि उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों और डॉक्टरों की सलाह पर ही वांगचुक को अस्पताल शिफ्ट किया है और इस दौरान पूरी संयम बरता गया। हालांकि, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) समेत कई विपक्षी दलों ने पुलिस की इस कार्रवाई की तीखी आलोचना की है।
संसद मार्च पर अडिग सीजेपी, दिल्ली में कड़ा पहरा
जंतर-मंतर पर वामपंथी छात्र संगठनों और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन अभी भी जारी है। सीजेपी ने सोमवार (20 जुलाई) से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 'संसद मार्च' का आह्वान किया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, इस मार्च के लिए संगठन ने कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली है।
बीएनएस की धारा 163 लागू
संसद सत्र के मद्देनजर नई दिल्ली जिले और संसद भवन के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू कर दी गई है। इसके तहत चार या अधिक लोगों के जुटने और अनधिकृत रैलियों पर सख्त पाबंदी है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति के संसद की तरफ मार्च करने की कोशिश करने वाले छात्र समूहों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को तुरंत हिरासत में लिया जाएगा।