25% बिजली की बचत करेंगे स्टेशन
मेट्रो फेज-4 में 45 इमारतों (स्टेशन और डिपो) को ग्रीन बिल्डिंग के मानकों के हिसाब से बनाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह स्टेशन 35 प्रतिशत पानी और 25 प्रतिशत बिजली की बचत करेंगे। निर्माण के दौरान ध्यान रखा जा रहा है कि ऊर्जा की बचत करने वाले उपकरणों का प्रयोग किया जाए। मेट्रो के अंदर वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए टेरेस गार्डन बनाया जाएगा। बिजली का प्रयोग कम करना पड़े, इसलिए एलिवेटेड स्टेशन को पूरी तरह से कवर करने के बजाय प्राकृतिक लाइटिंग की व्यवस्था की गई है। साथ ही परिसर हवादार भी रहे, जिससे पंखे कम प्रयोग करने पड़ें। उष्मा प्रतिरोधी टाइल्स का प्रयोग किया जा रहा है।
वर्ष 2014 में सौर ऊर्जा के लिए उठाया पहला कदम
डीएमआरसी ने वर्ष 2014 में सौर ऊर्जा के लिए पहला कदम उठाया था। द्वारका सेक्टर-21 में 500 किलोवाट सौर ऊर्जा का उत्पादन किया गया था। वर्तमान में दिल्ली मेट्रो के 142 स्थानों पर सोलन पैनल लगाए गए हैं, जिनसे 50 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में मेट्रो पांच प्रतिशत उर्जा स्टेशनों और अन्य जगहों पर लगे सौर ऊर्जा संयंत्रों से प्राप्त कर रही है।
30 प्रतिशत ऊर्जा मध्य प्रदेश के रेवा में लगे सौर ऊर्जा प्लांट से प्राप्त करती है। फेज-4 के तीनों कॉरिडोर पर स्टेशनों पर 10 मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा के उत्पादन से दिल्ली मेट्रो 60 मेगावाट की उत्पादक हो जाएगी।