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शहर से अचानक खत्म हो गए ‘समाजसेवी’

Sat, 25 Oct 2014 05:52 PM IST
ओम प्रकाश/अमर उजाला, फरीदाबाद
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यकीन मानिए फरीदाबाद से ‘समाजसेवियों’ की एक फौज अचानक गायब हो गई है। यह लोग लोगों की सेवा में अपने आपको तत्पर बताते थे। छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर धरना-प्रदर्शन करने और जाम लगाने तक का कदम उठा लेते थे। लेकिन अब ऐसे सभी सेवक लापता हैं।
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जबकि कुछ दिन पहले तक कोई गांवों का दौरा करके स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाने की लड़ाई लड़ रहा था तो कोई स्लम वालों का मसीहा बने फिर रहा था।

कोई अपनी जातीय अस्मिता की दुहाई दे रहा था तो कोई गली-कूचे की समस्याओं को लेकर शहर के चौक-चौराहों को जाम कर हीरो बनने की कोशिश में जुटा हुआ था। दरअसल, इनका मकसद समाजसेवा का नाटक कर राजनीतिक दुनिया में कदम जमाना था।

जैसे-जैसे राजनीतिक रंगमंच की कहानी आगे बढ़ती गई ये कथित समाजसेवक भूमिगत होते गए। कुछ टिकट बंटने के बाद घर बैठ गए और कुछ चुनाव हारने के बाद।

अब इन सेवकों से सेवा की आस रखने वाली जनता के सामने उनका असली चेहरा आ गया है। ऐसा लग रहा है कि शहर में न तो समस्याएं रहीं और न ही उनका निदान करवाने वाले समाजसेवी।
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कहा जा रहा है कि अब यह लोग या तो नगर निगम चुनाव में दिखेंगे या फिर चार साल बाद विधानसभा चुनाव नजदीक होने के समय।

नगर निगम और पुलिस के कुछ अधिकारियों का कहना है कि उन्हें तो चुनाव खत्म होने के बाद दिखावा और ड्रामा करने के लिए जाम लगाने और धरना-प्रदर्शन करने वालों से राहत मिल गई है। क्योंकि ऐसे सारे लोग इस समय शांत बैठ गए हैं।

कैसे बदल जाते हैं नेताजी
लोकसभा चुनाव से पहले कृष्णपाल गुर्जर ने टोल को हथियार बनाकर चुनाव लड़ा। टिकट मिलने के बाद जो उनकी पहली प्रेस कांफ्रेंस थी उसमें कहा था कि शहर को टोल रूपी जजिया कर से मुक्ति दिलाएंगे। लेकिन सांसद और मंत्री बनते ही इस मुद्दे से ही मुकर गए। विधानसभा चुनाव के दौरान इनेलो एवं बसपा ने यह मुद्दा उठाया। किसी ने बदरपुर तो किसी ने गुड़गांव टोल पर प्रदर्शन किया। चुनाव होते ही उसके लोग भी चुप हो गए। लोग अब भी टोल दे रहे हैं लेकिन चुनाव के बाद कोई भी पार्टी इस पर कुछ नहीं बोल रही है।

अब इन लोगों को खोज रही जनता
-दीपक चौधरी, सुखबीर शर्मा, बिजेंद्र नेहरा, मनोज शर्मा, वीर सिंह नैन, नीरा तोमर, दुलीचंद, आरएन सिंह, गजेंद्र लाला, दीपक त्यागी, बिजेंद्र मावी, संजय कौशिक, योगेंद्र नागर एवं अनूप शर्मा आदि....। पूर्व श्रम मंत्री के पौत्र अनूप ने तो बाकायदा एनआईटी विकास मंच गठित कर दिया था। हर रोज कहीं न कहीं प्रदर्शन करते थे। एनआईटी क्षेत्र में तो गंदे पानी में खड़े होकर फोटो खिंचवाने का रिवाज सा बन गया था। लेकिन अब लगता है कि सीवर जाम की समस्या खत्म हो गई।

युवा सेवा संगठन के संरक्षक वीरेंद्र गौड़ ने कहा कि ‘अगर ये लोग वास्तव में समस्याओं का समाधान करवाने के लिए मैदान में आए थे तो इन्हें सक्रिय रहना चाहिए। वरना फिर कौन विश्वास करेगा इनकी बातों पर।’
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