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पुलिस की चूक से बड़ा हो गया पशुवध का मामला

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पशुवध के आरोपी को पीट-पीटकर अधमरा करने और क्षेत्र में तनाव की खबर अमर उजाला के मंगलवार के अंक में प्रकाशित होने के बाद भी पुलिस ने मामले में उचित रूप से संज्ञान नहीं लिया।
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मंगलवार सुबह एनटीपीसी तिराहे पर एकत्र भीड़ को लाठीचार्ज कर काबू करने की योजना थी। उत्तेजित पुलिसकर्मियों के लाठीचार्ज पर उग्र भीड़ आपे से बाहर हो गई और पथराव कर कई वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी कर डाली। नौबत यहां तक आ गई कि पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी।

बिसाहड़ा गांव में पशुवध के आरोपी की हत्या के बाद दूसरे पक्ष के लोगों को रात में ही हिरासत में लेने पर क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई थी। मंगलवार सुबह 8 बजे खगौड़ा, ऊंचा अमीरपुर, ततारपुर, चौना समेत आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में एनटीपीसी तिराहे पर ग्रामीण जमा हो गए थे।
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पास ही में एक धार्मिक स्थल होने के कारण आला अधिकारियों के साथ जिले भर की फोर्स एकत्र हो गई थी। इस दौरान मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों के न होने की वजह से जाम लगाने वाले लोगों से बातचीत नहीं हो पाई।
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सीओ ने चेतावनी भरे लहजे में सबक सिखाने की बात कही

बताया गया कि रात में मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारी सुबह कुछ समय के लिए वहां से चले गए थे, तभी उन्हें उपद्रव की जानकारी मिली। अधिकारी जब तक उल्टे पांव वापस पहुंचे, तब तक मामला हाथ से निकल चुका था।

ग्रामीणों  का आरोप है कि जाम लगा रहे लोगों को दूसरे क्षेत्र के एक सीओ ने चेतावनी भरे लहजे में सबक सिखाने की बात कही। उन्होंने जारचा थाना प्रभारी पर पहले लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया।

लाठीचार्ज होते ही भीड़ तितर-बितर हो गई और लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। हमले में सीओ दादरी अनुराग सिंह के पैर में पत्थर लगा तो दो अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए। लोगों का कहना है अगर समय रहते भीड़ को समझा लिया जाता तो उपद्रव और फायरिंग की नौबत ही नहीं आती।
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अफवाह और फेक फोटो प्रसारित होने लगे

सोमवार रात गांववासियों ने पशुवध का आरोप लगाया। इस दौरान लोगों के पास व्हाट्सऐप के जरिये दोनों पक्षों की ओर से अफवाह और फेक फोटो प्रसारित होने लगे।

इस दौरान एक धार्मिक स्थल से भी निर्देश देने की अफवाह फैल गई। डीएम एनपी सिंह ने भी कहा कि अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एसएसपी गौतमबुद्ध नगर के मुताबिक उग्र भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिसकर्मियों को लाठीचार्ज करना पड़ा। फायरिंग हुई या नहीं, इसकी जांच मजिस्ट्रेट को सौंपी गई है।
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