वजीराबाद रोड दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले की लाइफ लाइन है। सड़क न सिर्फ जिले को बाकी दिल्ली से जोड़ती है, बल्कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और सहारनपुर का ट्रैफिक भी यहीं से निकलता है।
भोपुरा बॉर्डर से वजीराबाद पुल तक इसकी लंबाई बमुश्किल नौ किमी है। फिर भी, अगर आपको इससे निकलना है कि एक घंटे का अतिरिक्त समय लेकर चलिए।
कब कहां जाम मिल जाए, ऑटो चालक रास्ता रोके बीच सड़क पर खड़े हों, ट्रैफिक सिग्नल बंद पड़ा हो, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। रोजाना के मुसाफिरों का दर्द बयां करती रिपोर्ट ...।
रेंगते रहे वाहन, फंसे रहे लोग
भोपुरा बॉर्डर पर घड़ी की सुई सुबह के दस बजा रही थी। दोनों तरफ सड़क ऑटो चालकों के हवाले थी। सवारियों के इंतजार में चालक आपस में गुत्मगुत्थी किए हुए थे। इन्हें न तो पीछे से आ रहे वाहनों की चिंता थी, न बगल खड़े पुलिस के जवानों की।
बचते-बचाते बॉर्डर पार करने में करीब दस मिनट लग गया। आगे थोड़ी दिक्कत गगन सिनेमा के सिग्नल पर हुई। फिर नंद नगरी, लोनी रोड गोलचक्कर और गोकलपुरी फ्लाईओवर से करीब तीन किमी का सफर आसान रहा। करीब चार किमी का सफर तय करने में 18 मिनट लग गए।
असल दिक्कत एक कैरिज-वे यमुना पुल से हुई। नानकसर गुरुद्वारे से यमुना के दूसरे छोर की दूरी बेशक एक किमी है, लेकिन इसे पार करने में 25 मिनट का समय लगा। दरअसल, पुराने पुल से पुलिस बारी-बारी दोनों कैरिज-वे के ट्रैफिक को निकाल रही थी। ऐसे में वाहनों की लंबी लाइन लगी रही। इस बीच ट्रैफिक रेंगते हुए बढ़ रहा था। खास बात यह कि बाइक से नौ किमी का सफर एक घंटे में पूरा हुआ।
35 मिनट में आठ किलोमीटर
यमुना विहार बी-ब्लॉक सिग्नल पर बाइक करीब 10:20 बजे रुकी। एक तो पीक आवर्स, ऊपर से लोनी रोड गोलचक्कर से राइट टर्न लेता लोनी, सहारनपुर का ट्रैफिक। सड़क पर वाहनों का दबाव बढ़ गया था। सिग्नल क्रास करने में करीब तीन मिनट लगे।
इसके बाद सड़क की दूसरी बड़ी अड़चन भजनपुरा की लालबत्ती दिखी। चौराहे के दोनों तरफ सड़क तक खड़े रिक्शे, ऑटो और लाइट जंप करते बाइक सवार। इससे सिग्नल से निकलना आसान नहीं रहा। हरी बत्ती होने के बावजूद ट्रैफिक आगे नहीं बढ़ रहा था।
लगातार जलती लाल-हरी बत्तियों के बीच सिग्नल से निकलने में पंद्रह मिनट से ज्यादा का समय जाया हुआ। आगे खजूरी चौक फ्लाईओवर पर जानवर तो थे, लेकिन नानकसर गुरुद्वारे तक जाने में ज्यादा दिक्कत नहीं आई। बाइक आगे बढ़ती गई। करीब आठ किमी का सफर तय करने में 35 मिनट का समय लगा।
AAP सरकार ने नहीं दिया ध्यान
पिछले साल चुनाव से पहले तत्कालीन शीला दीक्षित की सरकार ने सड़क पर आवाजाही दुरुस्त करने के लिए योजना तैयार की थी। तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री ने दौराकर अधिकारियों से सड़क की स्टडी कराने का आदेश दिया था।
इसके तहत भजनपुरा और यमुना विहार सिग्नल पर फ्लाईओवर बनाने की योजना थी, लेकिन इसके बाद विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई। फिर ‘आप’ सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
इसके बाद प्रोजेक्ट लोकसभा चुनाव की आचार संहिता में फंसा हुआ है। खास बात यह कि इस मसले पर पीडब्ल्यूडी का कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं।