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दुर्लभ रोगी: स्वस्थ व्यक्ति के मल से बचाई मरीज की जान, सर गंगाराम के डॉक्टरों ने किया इलाज

Thu, 20 Jan 2022 05:55 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अस्पताल आने के बाद जब मरीज के मल की जांच की गई तो उसमें सी डिफिकल(एक खराब बैक्टीरिया) के कारण स्यूडोमेम्ब्रांससकोलाइटिस (बड़ी आंत में अल्सर) की बीमारी पता चली। यह बीमारी मरीज को पहले भी हुई थी लेकिन...
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गंगाराम अस्पताल, दिल्ली - फोटो : Social media
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विस्तार
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सुनने में शायद थोड़ा अजीब लगे कि मल के जरिए भी किसी बीमारी का इलाज किया जा सकता है। इसे चिकित्सीय क्षेत्र में फीकल माइक्रोबायोटाट्रांसप्लांट (एफएमटी) कहते हैं। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने इस तकनीक के जरिए 78 वर्षीय एक मरीज की जान बचाई है।

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डॉक्टरों ने बताया कि मरीज अल्सरेटिव कोलाइटिस नामक बीमारी से पीड़ित था। मरीज को स्यूडोमेम्ब्रानस कोलाइटिस (पीएमसी) नामक बीमारी भी थी, जिसके इलाज के लिए एफएमटी तकनीक का इस्तेमाल किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि कुछ दिन पहले मरीज को खूनी दस्त, निम्न रक्तचाप और उच्च हृदय गति के साथ गंभीर स्थिति में भर्ती किया गया था।

अस्पताल आने के बाद जब मरीज के मल की जांच की गई तो उसमें सी डिफिकल(एक खराब बैक्टीरिया) के कारण स्यूडोमेम्ब्रांससकोलाइटिस (बड़ी आंत में अल्सर) की बीमारी पता चली। यह बीमारी मरीज को पहले भी हुई थी लेकिन उस दौरान दवाएं इत्यादि उपचार से बीमारी ठीक हो गई थी। फिर से बीमारी होने पर मरीज को अस्पताल लाया गया।
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अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. पीयूष रंजन ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस बीमारी के लिए एकमात्र विकल्प स्वस्थ व्यक्ति से मल लेकर उसे मरीज की बड़ी आंत में प्रत्यारोपण करना है। इससे आंत में अच्छे बैक्टीरिया कीवृद्धि होती है और सी. डिफिकल  (एक खराब बैक्टीरिया) की संख्या कम होने लगती है। उन्होंने बताया कि पहले भी गंभीर एल्कोहलिक हेपेटाइटिस के लिए इस एफएमटी तकनीक का इस्तेमाल किया है। देश में एफएमटी के साथ बार-बार होनेवाली इस बीमारी का इलाज दुर्लभ मामला है। फिलहाल मरीज को छुट्टी दे दी गई।

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आंत में होते हैं अरबों बैक्टीरिया, बना सकते हैं बीमारी भी

डॉक्टरों के अनुसार मानव आंत में अरबों बैक्टीरिया होते हैं जिन्हें सामूहिक रूप से ‘आंत माइक्रोबायोम’ कहा जाता है। ये बैक्टीरिया मानव स्वास्थ्य को बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं लेकिन इनके असंतुलन से कई बीमारियां भी पैदा होती हैं। अच्छे और हानिकारक बैक्टीरिया के बीच असंतुलन की स्थिति को ‘डिस्बिओसिस’ कहा जाता है। आंतों के अंदर के ये जीवाणु(बैक्टीरिया) शरीर की इम्युनिटी यानि बीमारी और रोगों से लड़ने की क्षमता को प्रभावित करते हैं।

क्या है बीमारी, कैसे हुई?
आंतों में सी डिफिकल बैक्टीरिया के बैठने से स्यूडोमेम्ब्रांसस कोलाइटिस नामक बीमारी होती है। यह बीमारी आमतौर पर बुजुर्ग और लंबे समय तक एंटीबायोटिक थेरेपी, कीमोथेरेपी या इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं लेने वाले मरीजों को काफी परेशान करती है। दस्त, मलमें रक्त और पेट में दर्द इसके लक्षण हैं।

करीब 30 फीसदी मरीजों में यह बीमारी बार बार भी हो सकती है। इस बीमारी का प्रारंभिक उपचार एक एंटीबायोटिक है, जिसे ‘ओरल वैनकोमाइसिन’ कहा जाता है। यह लगभग तीन-चौथाई रोगियों में प्रभावी है लेकिन इसके बाद दोबारा से अगर बीमारी होती है तो फिर फीकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांट (एफएमटी) सबसे अच्छा उपचार विकल्प है।

ऐसे समझें एफएमटी के बारे में
एफएमटी का अर्थ मरीजों में उचित परीक्षण के बाद एक स्वस्थ व्यक्ति से मल के अर्क को स्थानांतरित करना है। यह बड़ी आंत में या छोटी आंत में कोलोनोस्कोपी द्वारा किया जा सकता है। यह प्रक्रियान केवल ओ.पी.डी. के आधार पर की जा सकती है बल्कि यह बहुत ही लागत प्रभावी भी है।
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