पुलिस अधिकारियों के अनुसार जेएनयू को लेकर दर्ज एफआईआर में करीब 90 फीसदी मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। हालांकि जनवरी, 2020 में जेएनयू में हुई मारपीट को लेकर दो वर्ष से ज्यादा हो चुका है। इस मामले में अभी तक न किसी की गिरफ्तारी हुई और न ही चार्जशीट दाखिल हुई है।
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) विवादों का अड्डा बनता जा रहा है। 2017 से अभी तक के विवादों में पुलिस ने करीब 52 एफआईआर दर्ज की हैं, लेकिन एक भी एफआईआर में अभी तक किसी की गिरफ्तार नहीं हुई है। वर्ष 2020 में हुए मारपीट मामले में तो अभी तक न तो चार्जशीट भी दाखिल नहीं हो सकी है और न ही किसी की गिरफ्तारी हो सकी है। इस मामले में बाहरी छात्रों ने आकर जेएनयू के छात्रों से मारपीट की थी।
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दक्षिण-पश्चिमी जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का मानना है कि जेएनयू में आए दिन कोई न कोई विवाद पैदा हो जाता है। इन विवादों के चलते जेएनयू मीडिया की सुर्खियां में रहता है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जेएनयू को लेकर वर्ष 2017 से लेकर अब तक कुल 52 से ज्यादा एफआईआर हो चुकी हैं। कुछ गंभीर धाराओं में दर्ज एफआईआर को छोड़कर ज्यादातर मामलों में गिरफ्तार नहीं हुई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार जेएनयू को लेकर दर्ज एफआईआर में करीब 90 फीसदी मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। हालांकि जनवरी, 2020 में जेएनयू में हुई मारपीट को लेकर दो वर्ष से ज्यादा हो चुका है। इस मामले में अभी तक न किसी की गिरफ्तारी हुई और न ही चार्जशीट दाखिल हुई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस मामले में तो अभी तक चार्जशीट तैयार करना भी शुरू नहीं किया गया है।
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जिले के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जेएनयू में नजीब के गायब होने व मार्च महीने में छात्रा के साथ छेड़छाड़ के मामले को लेकर पैदा होने वाले विवाद के मुद्दे बहुत छोटे होते हैं। जेएनयू में विवाद के ज्यादातर मुद्दे खाना ठीक नहीं बनना, चुनाव, जाति सूचक शब्द कहने, लाइब्रेरी और किसी कार्यक्रम को विरोध करना आदि होते हैं। जेएनयू को लेकर जो एफआईआर दर्ज हुई हैं उनके मुद्दे बहुत ही छोटे हैं।
अभी तक नहीं हुई गिरफ्तारी
जेएनयू को लेकर दर्ज एफआईआर 52 से ज्यादा एफआईआर में कुछ केसों को छोड़कर ज्यादातर केसों में एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जेएनयू को लेकर जो एफआईआर दर्ज हुई हैं वह बहुत ही हल्की धाराओं में हुई हैं। इन धाराओं में सात वर्ष या उससे कम की सजा होती है। सात वर्ष या उससे कम की सजा वाली एफआईआर में पुलिस गिरफ्तार नहीं करती है। ऐसे में पुलिस ने जेएनयू को लेकर दर्ज हुर्ह एफआईआर में किसी को गिरफ्तार नहीं किया है।