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इंसानियत : एसआई की मदद से बुजुर्ग को मिली दो गज जमीन, पेश की हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल

Wed, 29 Apr 2020 12:05 AM IST
Vikas Kumar पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एसआई मलखान सिंह यादव - फोटो : amar ujala
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‘हर मय्यत का हक है कि उसको चार कंधे मिलें।’ ये शब्द जामिया नगर में रहने वाली शबनम मन्नान ने ओखला थाने में तैनात एसआई मलखान सिंह यादव के लिए फेसबुक पर लिखे हैं। शबनम ने मलखान सिंह को इंसानियत का हीरो बताया है।

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इंदिरा कल्याण कैंप ओखला में तीन-चार दिन से भूखे जिस बुजुर्ग को लोग कोरोना संक्रमित समझकर दुत्कार रहे थे, एसआई मलखान सिंह ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मलखान ने बुजुर्ग के रिश्तेदारों को बिहार व दिल्ली में ढूंढना शुरू किया तो कई दिन बाद जामिया नगर में गांव की दूर की रिश्तेदार बहन शबनम मिली। एसआई मलखान ने बुजुर्ग को कब्रिस्तान पहुंचाया। ओखला के लोग मलखान को हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल कह रहे हैं।

दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ड्यूटी के दौरान एसआई मलखान सिंह को बुजुर्ग मकसूद आलम (65) ओखला में बदहवास हालत में मिले थे। स्थानीय लोग उन्हें कोरोना संक्रमित समझकर दुत्कारकर भगा रहे थे। बुजुर्ग ने कई दिन से खाना नहीं खाया था। मलखान ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। मकसूद आलम अपना पता बिहार का गांव चारवामा बता रहे थे। 
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एसआई मलखान ने एसएसपी मुंगेर व थानाध्यक्ष वरविगाह के माध्यम से गांव चारवामा के मुखिया से बात की तो पता लगा कि मकसूद के गांव की बहन शबनम जामिया नगर के जाकिर नगर में रहती है। शबनम ने बताया कि मकसूद अपनी पेंशन लेने दिल्ली आए थे और लॉकडाउन में फंसकर रास्ता भटक गए।

एसआई ने पोस्टमार्टम करा मलखान का शव जाकिर नगर तक पहुंचवाया। दिल्ली पुलिस के अधिकारी एसआई मलखान पर गर्व कर रहे हैं। वैसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह पता लगेगा कि बुजुर्ग की मौत भूख से तो नहीं हुई है।

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