30वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में ऐसे-ऐसे शिल्पकारों की कलाकृतियां देखने को मिल रही हैं जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इन्हीं शिल्पकारों में एक नाम है पश्चिम बंगाल से आए शिल्पकार आशीष कुमार मालाकार का।
'शोलापित कला’ में नेशनल अवार्ड जीतकर रिकार्ड बना चुके हैं। तालाब में पैदा होने वाली लकड़ी को बांग्लादेश से मंगाकर दुर्लभ कलाकृतियों का निर्माण करते हैं। उनके द्वारा बनाई गई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कलाकृति लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
वर्ष 1990 के नेशनल अवार्डी आशीष ने बताया कि शोलापित नामक लतानुमा लकड़ी तालाबों में पाई जाती है। उसे काटकर सुखाया जाता है, जिसके बाद उसमें सफेद कलर आ जाता है। चाकू और फेविकोल के सहयोग से अनेक कलाकृतियों को आकार दिया जाता है।
ज्यादातर कलाकृतियां दुर्गा, गणेश, कृष्ण अर्जुन और मां काली की हैं। शोलापित लकड़ी रूई के समान हल्की होती है। इसकी सबसे ज्यादा पैदावार बांग्लादेश में होती है। वहां के व्यापारी कोलकाता के विधननगर में लाकर लकड़ी बेचते हैं।
40 साल तक यूं ही बना रहता है कलर
-शोलापित से बनाई गई कलाकृति की उम्र 35 से 40 साल तक होती है। मालाकार के मुताबिक कलाकृतियों का कलर जल्दी खराब नहीं होता। क्योंकि इसमें किसी प्रकार के कलर का उपयोग नहीं किया जाता।
एडिनवरा मेले का मेनगेट बनाने का मिला था मौका
-शिल्पकार आशीष कुमार ने बताया कि उन्होंने अपनी इस कला का प्रदर्शन स्कॉटलैंड, थाईलैंड, इटली, जिम्बाब्वे, सिंगापुर समेत अन्य देशों में कर चुके हैं। वर्ष 2011 में स्कॉटलैंड के एडिनवरा में आयोजित मेले का मुख्य द्वार उन्होंने शोलापित से ही बनाकर तैयार किया था। इस कला में उनके पिता आदित्य मालाकार को वर्ष 1974 में, दादी कात्यानी मालाकार को वर्ष 1989 में और उन्हें वर्ष 1990 में नेशनल अवार्ड से नवाजा गया है।
सूरजकुंड मेला:
दिनोंदिन बढ़ रही दर्शकों की भीड़, हजारों विद्यार्थी पहुंच रहे मेला
फरीदाबाद में बृहस्पतिवार को सूरजकुंड मेले की चौपाल देसी कलाकारों के नाम रही। विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने अपने पारंपरिक वेशभूषा में ठुमके लगाकर दर्शकों का मनोरंजन किया। शाम के वक्त विदेशी कलाकारों ने चौपाल पर जलवे बिखेरे।
मेले के समापन की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है मेले में दर्शकों की भीड़ उसी रफ्तार से बढ़ रही है। बृहस्पतिवार को भी बड़ी संख्या में दर्शकों ने मेले का आनंद लिया। मेले के चारों ओर बनाई गई पार्किंग लगभग फुल रही। भीड़ में सर्वाधिक संख्या स्कूल कॉलेज विद्यार्थियों छात्रों की रही। क्योंकि सरकार ने उनके लिए मेला फ्री कर रखा है।
राजस्थान, पंजाब, झारखंड, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से लोगों का मनोरंजन किया। झारखंड के कलाकारों ने जहां छऊ नृत्य में महिषासुर मर्दन की प्रस्तुति कर दर्शकों की तालियां बटोरी वहीं राजस्थान के कलाकारों ने चकरी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
रूपसिंह एंड पार्टी के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत चकरी नृत्य में सभी कलाकार खेतीबाड़ी के कारोबार से जुड़े हैं। वहां की लोक परंपरा को बनाए रखने के लिए शादी-विवाह, होली, दीपावली समेत अन्य अवसरों पर वह चकरी नृत्य की प्रस्तुति करते हैं। इसे उत्सव नृत्य के रूप में भी जाना जाता है। वहीं दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश के कलाकारों ने लांवड़ा हास्य नाटिका प्रस्तुत कर लोगों का मनोरंजन किया।
मेला टिकट में संशोधन
-मेला प्रशासन ने टिकट दरों में संशोधन किया है। अब सामान्य लोगों के लिए टिकट की दर 80 रुपये प्रति व्यक्ति और वीकेंड पर 120 रुपये निर्धारित की गई है। कॉलेज गोईंग छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए आम दिनों में 40-40 रुपये जबकि वीकेंड पर 60-60 रुपये निर्धारित की गई है। मेला प्रशासन ने अब इस बाबत सभी प्रवेश द्वार पर रेट लिस्ट भी लगा दी है।