अदालत ने कहा कि जब स्टेडियम का निर्माण कार्य ही पूरा नहीं हुआ है, तो आप कैसे टिकटों की बिक्री कर सकते हैं। जब तक आप सभी संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं ले लेते, तब तक हम दक्षिण एमसीडी को प्रोविजनल प्रमाणपत्र देने का निर्देश नहीं दे सकते।
स्टेडियम में आने वाले दर्शकों की सुरक्षा जरूरी है। स्टेडियम में फायर टेंडर के आने की जगह तो होनी ही चाहिए। बिल्डिंग प्लान व अन्य सुरक्षा संबंधी औपचारिकताएं आप को पूरी करनी ही होंगी। तय नियमों का पालन किए बिना आप कैसे मैच करवाने की इजाजत मांग सकते हैं। बीसीसीआई सुरक्षा मापदंडों को दरकिनार कर कैसे मैच की इजाजत दे सकता है।
यह विश्व कप मैच है और यदि कोई भी हादसा हो गया, तो पूरे विश्व में भारत की बदनामी होगी। अदालत ने दक्षिण एमसीडी को स्टेडियम का निरीक्षण कर मंगलवार को अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
डीडीसीए के तर्क
डीडीसीए के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि फिरोजशाह कोटला मैदान में कुल 10 मैच होने हैं, जिनमें 6 महिला व 4 पुरुषों के हैं। दिल्ली देश की राजधानी है और कोटला के अलावा कोई अन्य स्टेडियम नहीं है। दिल्ली में मैच नहीं होने से क्रिकेट प्रेमियों को निराशा होगी और क्रिकेट टीम में भी कई खिलाड़ी दिल्ली के हैं।
इसके अलावा भूमि विकास विभाग ने अनापत्ति प्रमाणपत्र दे दिया है। स्टेडियम में 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। शेष आगामी 20 दिनों में पूरा कर लेंगे। ऐसे में एमसीडी को मैच करवाने के लिए प्रोविजनल प्रमाण पत्र देने का निर्देश दिया जाए। मैच करवाने के लिए अवकाशप्राप्त न्यायमूर्ति मुकुल मुद्गल को नियुक्ति किया जा सकता है।
एमसीडी के अधिवक्ता गौरव कंठ ने डीडीसीए के तर्क को गलत बताते हुए कहा कि स्टेडियम में अभी मात्र 40 प्रतिशत काम हुआ है। इसके अलावा हमने डीडीसीए को काफी निर्माण पर आपत्ति जताते हुए उसे हटाने को कहा था, लेकिन उसे नहीं हटाया गया। सुरक्षा मापदंडों को दरकिनार नहीं कर सकते।
टी-20 विश्वकप क्रिकेट मैचों पर भी असमंजस
फिरोजशाह कोटला मैदान में टी-20 विश्वकप क्रिकेट मैचों पर भी असमंजस के बादल छा गए हैं। हाईकोर्ट ने दिल्ली जिला एवं क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) को झटका देते हुए स्पष्ट कर दिया कि क्रिकेट प्रेमियों का जीवन दांव पर लगाकर स्टेडियम में काम पूरा हुए बिना मैच करवाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि कोई भी हादसा होने पर पूरे विश्व में भारत का नाम खराब होगा।
न्यायमूर्ति एस मुरलीधर व न्यायमूर्ति विभू बाखरू की खंडपीठ ने डीडीसीए के उस तर्क को खारिज कर दिया कि वे अगले बीस दिनों में स्टेडियम के अधूरे काम को पूरा करवा देंगे। अदालत ने कहा कि मात्र आश्वासन पर आपको मैच करवाने के लिए प्रोविजनल सर्टिफिकेट प्रदान करने का आदेश नहीं दिया जा सकता।
अदालत ने डीडीसीए के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि मैच के टिकटों की बिक्री के लिए सोमवार निर्णय का अंतिम दिन है। विश्व कप होने के कारण पूरे विश्व में टिकटों की बिक्री की जानी है।