बीते पांच दिसम्बर को महिला के साथ्ा रेप करने के आरोपी कैब संचालक शिव कुमार यादव के खिलाफ पुलिस की जांच जारी है जिसमें रोज ही कुछ चौंका देने वाले खुलासे हो रहे हैं।
ताजा मामले में पुलिस को पता चला है कि एक व्यक्ति ऐसा है जिसने शिव का पुलिस वैरिफिकेशन, रजिस्ट्रेशन के कागज और उसकी स्विफ्ट डिजायर कार के लिए कमर्शियल लाईसेंस बनाने में भी मदद की।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, शिव ने रजिस्ट्रेशन के कागज किसी एजेंट की मदद से बनवाए थे। इसके अलावा शिव के पास कार खरीदने के पूरे पैसे भी नहीं थे, ऐसी स्थिति में उस एजेंट ने ही शिव की मदद करते हुए उसे फाईनेंस पर कार उपलब्ध कराने में मदद की।
सिर्फ यही नहीं उबर कंपनी में शिव को काम दिलाने के लिए नकली पुलिस वैरिफिकेशन भी बनावाया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि पूछताछ के दौरान शिव ने उक्त व्यक्ति के बारे में जानकारी दी है।
बड़े रैकेट का अंदेशा
इसी बीच सबूत जमा करने के लिए जांच टीम शिव को घटनास्थल और मथुरा ले गई। यहां से पुलिस ने कुछ सबूत जुटाए हैं। इसके अलावा उबर कंपनी की शिकायत पर आरोपी शिव के पास से आईफोन 4एस बरामद कर कंपनी को सौंप दिया गया है।
उक्त मोबाइल फोन से शिव ने कई लोगों को फोन किया। पुलिस उन कॉल नम्बरों की डिटेल खंगाल रही है। वहीं, गुरूवार दोपहर करीब दो बजे पुलिस शिव को कोर्ट के समक्ष पेशी भी होगी।
जिस एजेंट ने शिव की मदद करते हुए उसका नकली पुलिस वैरिफिकेशन कागज से लेकर कई दस्तावेज बनाने में मदद की, पुलिस को शक है कि वह एजेंट एक बडे़ रैकेट से जुड़ा हुआ है।
पुलिस का कहना है कि यह एजेंट तो रैकेट का मात्र एक मोहरा है। रैकेट के तार बहुत दूर तक फैले हुए है। शिव के पास से मिले दस्तावेज पुलिस के सामने काफी हैरान पैदा करने वाले थे।
सभी दस्तावेजों में सरकारी मुहरें लगी थी। जांच का एक एंगल यह भी है कि नकली मुहरें बनाकर इस तरह के दस्तावेज बनाने में कितनी रकम वसूली जाती है और यह पैसा किसे-किसे पहुंचाया जाता है। इस तरह के गोरखधंधों के तार कहां तक फैले हुए हैं।
परिवहन अधिकारी भी शक के दायरे में
दस्तावेजों में मिले सरकारी मुहरों से एक बात तो स्पष्ट है कि कहीं न कहीं इस मामले में परिवहन विभाग के किसी बडे़ अधिकारी की मदद ने भी मदद की हो। क्योंकि बिना विभागीय साझेदारी के दस्तावेजों पर मुहर और हस्ताक्षर बनाना संभव नहीं है।
एक पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया है कि हमें शक है कि अन्य कैब कंपनियों के कई ड्राइवरों के पास भी इस तरह के नकली दस्तावेज हों।
इसके अलावा इस रैकेट में परिवहन विभाग के कुछ अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। यदि जांच में इन बातों पुष्टि होती है तो मामले में अलग एफआईआर दर्ज की जाएगी।
बहरहाल पुलिस की जांच टीम ने एजेंट का नाम अथवा कोई अन्य जानकारी देने से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि उसकी जल्द गिरफ्तारी कर ली जाएगी।