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कांग्रेस के खिलाफ शिया समुदाय का मार्च

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शिया समुदाय और अंजुमन-ए-हैदरी ने मंगलवार को दिल्ली-यूपी गेट (गाजीपुर बॉर्डर) से 11 मूर्ति तक मार्च का ऐलान किया है। कर्बला विवाद को लेकर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद की अगुवाई में लोग पैदल या अपने वाहनों से मार्च करेंगे।
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लोगों का कहना है कि अगर उनको 11 मूर्ति जाने से रोका गया तो वे शांतिपूर्वक गिरफ्तारी भी देंगे।

अंजुमन-ए-हैदरी के मुताबिक, कांग्रेस ने एक सप्ताह में कर्बला विवाद सुलझाने का अपना वादा पूरा नहीं किया, इसलिए वे मार्च के दौरान कांग्रेस के बहिष्कार का ऐलान भी करेंगे।

सोनिया ने किया था वादा

धर्मगुरु ने मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर के अलावा आसपास के राज्यों से समुदाय के लोगों को यहां पहुंचने के लिए कहा है।

अंजुमन-ए-हैदरी के बहादुर अब्बास ने बताया कि 29 मार्च को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मौलाना कल्बे जव्वाद से वादा किया था कि वह हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार एक सप्ताह के भीतर करबला विवाद को सुलझवा देंगी, लेकिन समय बीतने के बाद भी मामला वैसा ही है।

लिहाजा मौलाना कल्बे जव्वाद ने शिया समुदाय के उलेमा, मौलाना व अन्य लोगों से राजधानी में जुटने का आह्वान किया है।
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गांधी जी से जोड़ा आंदोलन का कनेक्‍शन

मौलाना ने फैसला किया है कि जिस तरह बापू ने डांडी मार्च कर नमक कानून तोड़ा था। उसी तरह वे अपनी मांगों को मंगवाने के लिए शांतिपूर्वक मार्च कर सरकार को संदेश देंगे।

बहादुर अब्बास ने बताया कि 11 मूर्ति तक मार्च को इसलिए चुना गया है क्योंकि 11 मूर्ति बापू के डांडी मार्च का प्रतीक है। मार्च में जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी के भाई याहया बुखारी भी शिरकत कर सकते हैं। वहीं, प्रदर्शन के मद्देनजर काफी संख्या में पुलिस यूपी बॉर्डर पर तैनात रहेगी।
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