आम आदमी पार्टी की ओर से खरीदफरोख्त के आरोप के बाद चर्चा में आए प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष शेर सिंह डागर करोड़ों के मालिक है। केजरीवाल ने उन पर अपने विधायक को चार करोड़ का ऑफर देने का आरोप लगाया था। साथ ही एक स्टिंग ऑपरेशन की वीडियो भी जारी की थी, जिसे वह कल उपराज्यपाल को सौपेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने भी अगली सुनवाई में आप को उस वीडियो को प्रस्तुत करने को कहा है। उधर, कांग्रेस लगातार वीडियो से जुड़े लोगों पर कानूनी कार्रवाई की मांग कर रही है। ऐसे में शेर सिंह की परेशानियां बढ़ते दिख रही हैं। वीडियो के उजागर होने के बाद भाजपा ने भी डागर से स्पष्टीकरण मांग लिया है।
पूरे प्रकरण में बुरे फंसते शेर सिंह ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से की। 1970-71 में वह शहीद भगत सिंह कॉलेज में स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष रहे।
इसके अगले ही साल कॉलेज ने उन्हें बेस्ट स्टूडेंट अवॉर्ड भी दिया। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति में भी भाग लिया और 1972-73 में डूसू के जनरल सेक्रेटरी भी रहे। उन्होंने भाजपा किसान मोर्चा में सह प्रभारी का भी काम किया।
अभी पढ़ाई कर रहे हैं डागर
बचपन से ही स्पोर्ट्स में रुचि रखने वाले डागर अब भी पढ़ाई कर रहे हैं, वह फिलहाल वह पीएचडी कर रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उन्होंने साहसिक काम किए हैं।
2008 में वह दिल्ली के मेहरौली विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़े लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी से पराजित हो गए। खुद स्टिंग ऑपरेशन का शिकार होने वाले डागर ने अपनी साइट पर लिख रखा है कि वह पिछले 42 सालों से जनता की सेवा में लगे हैं और भ्रष्टाचार के तीव्र विरोधी हैं।
हालांकि इस बात का दावा भी करते हैं कि दिल्ली और हरियाणा में उनके पास कई फार्म हाउस भी हैं। वहीं, यह भी कहते हैं कि वह साउथ दिल्ली के एक किसान के घर में जन्मे हैं। डागर का दावा है कि उनके पिता ने आजादी के आंदोलन में अपना पूरा जीवन लगाया। उनके परिवार में दो लड़कियां और एक बेटा है। उनकी बड़ी बेटी आर्किटेक्ट इंजीनियर है और छोटी बेटी वकालत के पेशे से जुड़ी है।
एक नजर में शेर सिंह डागर की कुंडली
-1970 से छात्र राजनीति में सक्रिय हुए।
-1970-71 में शहीद भगत सिंह कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष बने।
-बेस्ट स्टूडेंट के खिताब से भी नवाजे गए।
-1971-72 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के महासचिव बने।
-भाजपा युवा मोर्चा में भी कई पद पर रह चुके हैं।
-2008 में महरौली विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ा, हार का सामना करना पड़ा।
-2013 के विधानसभा चुनाव में भी टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी ने नहीं दिया, बगावती तेवर अख्तियार किए। लगातार धरना-प्रदर्शन करते रहे।
-2013 में ही प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष बने।
-सामाजिक कार्यकर्ता भी है।