हाईकोर्ट ने भाजपा नेता विजेंद्र गुप्ता के खिलाफ दायर मानहानि मामले में पेश न होने पर पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर लगाए गए तीन लाख रुपये के जुर्माने को माफ करने से इंकार कर दिया। यही नहीं, अदालत ने शीला को शनिवार को पेशी से छूट प्रदान करने से भी इंकार करते हुए उन्हें ट्रायल कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति वीपी वैश ने शीला दीक्षित की ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए स्थगन आदेश देने से इंकार कर दिया। अदालत ने उन्हें शनिवार को संबंधित अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा अदालत ने शीला की याचिका के आधार पर विजेंद्र गुप्ता को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। अदालत ने सुनवाई 6 जनवरी तय की है। ट्रायल कोर्ट में मामले की सुनवाई 20 दिसंबर तय है।
कब लगा था शीला पर जुर्माना
केरल की राज्यपाल पद से 26 अगस्त को त्यागपत्र देने के बावजूद ट्रायल कोर्ट में पेश न होने पर अदालत ने शीला दीक्षित पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। अदालत ने उन्हें दो लाख रुपये दिल्ली लीगल अथॉरिटी और एक लाख रुपये विजेंद्र गुप्त को देने का निर्देश दिया था। शीला ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
गौरतलब है शीला दीक्षित ने विजेंद्र गुप्ता के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि वर्ष 2012 में एमसीडी चुनावों के दौरान गुप्ता ने उन पर बिजली कंपनियों से मिलीभगत का आरोप लगाकर उनकी प्रतिष्ठा नष्ट की है।