देश के प्रथम शिक्षा मंत्री पर प्रकाशित एक पुस्तक में मौलाना अबुल कलाम आजाद के साथ नजमा हेपतुल्ला की एक तस्वीर के कथित मॉर्फिंग मामले में सीबीआई ने हेपतुल्ला को क्लीन चिट दे दी।
सीबीआई ने कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिसके आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सके। अदालत ने इस जवाब पर असंतुष्टि जताते हुए सीबीआई को अपना नोट पेश करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने मामले की सुनवाई 16 जनवरी तय करते हुए सीबीआई को नोट पेश करने के अलावा यह भी स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्या जांच में कानूनी प्रावधानों का पालन किया गया है।
इससे पहले सीबीआई ने अदालत में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा कि जांच में ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं मिला, जिसके आधार पर हेपतुल्ला के खिलाफ मुकदमा चलाया जा सके। एजेंसी ने कहा कि वह खुद जांच आधारित एक नोट बनाकर भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के पास भेज रही है, ताकि उचित विभागीय कार्रवाई की जा सके।
अदालत आजाद के पोते फिरोज बख्त अहमद की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याची ने आरोप लगाया है कि हेपतुल्ला को मई 1958 में स्नातक की उपाधि मिली थी, जबकि आजाद का 22 फरवरी 1958 को निधन हो गया था। ऐसे में उक्त फोटो कैसे खींची जा सकती है। स्पष्ट है कि फर्जीवाड़ा किया गया है।