दिल्ली को विकास के पथ पर अग्रसर करने वाली दिवगंत शीला दीक्षित आम से खास होने के बाद भी अपने कॉलेज मिरांडा हाउस से कभी अलग नहीं हो पाईं। कॉलेज से हमेशा उनका जुड़ाव रहा। जब भी कॉलेज प्रशासन ने बुलाया वे आम महिला की तरह पहुंची। अपनी होनहार एल्युमिनाई के जाने का दु:ख कॉलेज में हर किसी को है। अपनी प्रिय विद्यार्थी की याद में सोमवार को कॉलेज श्रद्धांजलि सभा का आयोजन होगा।
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष शीला दीक्षित ने नई दिल्ली स्थित जीसस एंड मैरी स्कूल से पढ़ाई कीं। मिरांडा हाउस से उन्होंने इतिहास ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की है। कॉलेज से निकलने के बाद से लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने तक वह हमेशा कॉलेज के हर प्रोग्राम में शिरकत करती रहीं।
कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. विजयलक्ष्मी नंदा कहती हैं कि कॉलेज ने जब-जब उन्हें बुलाया वह तब-तब वे यहां आईं। वह बड़ी नेता बनने के बाद भी एक आम महिला की तरह ही सबसे मिलती थीं। उनके इसी स्वभाव के कारण उनका कॉलेज से हमेशा जुड़ाव बना रहा। डॉ. नंदा ने कहा कि उनके जाने का बेहद दु:ख है। यह देश के लिए ही नहीं कॉलेज के लिए भी बड़ा नुकसान है। इसे कभी भरा नहीं जा सकता।
'वर्ष 2005 में उनका दाखिला फॉर्म भेंट किया'
मिरांडा हाउस मेें जब वर्ष 2005 में एलुमिनी एसोसिएशन का गठन किया गया तो एसोसिएशन ने सबसे पहले शीला दीक्षित को ही सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में उन्हें उनके दाखिले के समय भरे गए आवेदन फॉर्म की प्रति भेंट की गई। इसे देख कर वे फूली नहीं समाईं। यह कहना है वर्ष 2005 से फरवरी 2019 तक प्रिंसिपल रही डॉ. प्रतिभा जौली का। उन्होंने कहा कि वे कॉलेज आने का कोई मौका नही छोड़ती थी। जब भी किसी तरह के टॉक शो के लिए कोई चैनल उनसे संपर्क करता तो वह उन्हें कॉलेज बुलाती थीं।
वर्ष 2010 में कॉलेज के हॉस्टल विंग के शिलान्यास के अवसर पर भी वे पहुंची थीं। उनके व्यक्तित्व में ठहराव था। वह कहती हैं कि जिस समय वे मुख्यमंत्री थी उसी दौरान हमारे कॉलेज की एक अन्य एलुमिनी शैलजा चंद्रा दिल्ली सरकार में सचिव पद पर थी। ऐसे में हम कह सकते हैं कि मिरांडा हाउस के विद्यार्थी दिल्ली को चला रहे थे।