संत समाज में मिलावट के खिलाफ शंखनाद करेगा। मिलावटी खानपान और दूषित पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ ही सरकार पर कठोर कानून बनाने के लिए दबाव बनाया जाएगा।
द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि कठोर कानून और जागरूकता से ही बदलाव संभव है। वह सोमवार रात महानगर में पत्रकारों को धर्म संसद में लिए गए फैसले की जानकारी दे रहे थे।
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि खानपान और हवा-पानी की गुणवत्ता का प्रभाव सेहत के साथ ही सोच पर भी पड़ता है। इससे विचार का निर्धारण होता है।
विचार से समाज और राष्ट्र का भविष्य तय होता है।यानी पर्यावरण और खानपान बिगड़ने के बाद राष्ट्र की रक्षा और समाज की अस्मिता प्रभावित होती है। उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि किसी राजनीतिक दल के एजेंडे में ये समस्याएं नहीं हैं।
ऐसे में इनको नियंत्रित करने का प्रयास भी नहीं होगा। संत समाज अब इसका दायित्व अपने कंधों पर लेगा। धर्म संसद में इसका निर्णय कर लिया गया है।
हवा पानी की शुद्धता बनाए रखने के लिए लोगों का आह्वान किया जाएगा और खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों पर कार्रवाई के लिए कठोर कानून बनाने को संसद पर दबाव बनाया जाएगा।
वर्षा काल के बाद संत राष्ट्र भ्रमण पर निकलेंगे। इसके लिए गांवों से शहरों तक जागरूकता अभियान चलेगा। जनवरी में संत समाज संसद तक अपना विचार और नागरिकों की भावनाएं पहुंचाएगा।