जावेद अली अपनी सेक्स संबंधी समस्या से काफी परेशान था। उसने पहाड़गंज स्थित सेक्स संबंधी बीमारियों का शर्तिया इलाज का दावा करने वाले डॉक्टर राजेश अब्बोट से संपर्क किया।
अदालत ने याची के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है। अदालत ने कहा अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह से सफल रहा है कि याची ने पहाड़गंज स्थित जैदी दवाखाना के डॉ. राजेश अब्बोट से इलाज करवाया।
न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि अभियुक्त ने स्वयं माना है कि उसे सेक्स संबंधी समस्या थी और 11 हजार रुपये फीस अदा करने के बावजूद उसकी समस्या दूर नहीं हुई।
क्यों नहीं सुलझी समस्या?
पैसे खर्च होने के बावजूद सफल इलाज न होने पर उसने डॉक्टर की हत्या कर दी थी। अब उसे ताउम्र जेल में रहना होगा। हाईकोर्ट ने उसे मिली सजा संबंधी फैसले को उचित ठहराया है।
फायदा न होने से डॉक्टर से दुश्मनी हो गई। इसके अलावा मृतक डॉक्टर की पत्नी ने भी माना कि याची ने उनके पति से इलाज करवाया था।
अदालत ने कहा कि वे ट्रायल कोर्ट के इस निष्कर्ष से सहमत है कि सेक्स संबंधी समस्या का सही इलाज न होने के कारण ही उसने डॉक्टर की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
दोषपूर्ण तरीके से हुई जांच!
उसके पास हत्या करने का मोटिव था। अदालत ने माना कि इस मामले में पुलिस ने दोषपूर्ण तरीके से जांच की है और इस कमियां छोड़ी हैं, लेकिन अदालत ने कर्तव्य है कि सावधानी से सभी साक्ष्यों का मूल्यांकन करे।
अदालत ने कहा ऐसे में कुछ के गवाही से मुकरने का लाभ उसे नहीं दिया जा सकता। अत: वे उसकी अपील खारिज करते हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार जावेद ने 28 मई 2006 को गोल मार्केट स्थित बंगाली स्वीट के पास डॉक्टर राजेश की गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया था।