अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के एक मामले में गिरफ्तार सात विदेशी नागरिकों को उनके मूल देशों अमेरिका और यूक्रेन जाने की अनुमति दे दी है। अदालत ने कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार मौलिक अधिकारों का विस्तार है। विशेष एनआईए जज प्रशांत शर्मा ने दिए आदेश में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरोन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 21 और 23 के तहत बरी कर दिया। एफआरआरओ ने पहले 18 सितंबर को प्रत्येक पर 5.5 लाख रुपये जुर्माना लगाकर अपराधों को कंपाउंड कर दिया था।
जज शर्मा ने कहा कि आरोपियों ने पासपोर्ट रिलीज और विदेश यात्रा की अनुमति के लिए आवेदन किए थे। अदालत ने नोट किया कि यूएपीए के तहत जांच जारी है और एनआईए को इसे पूरा करने में समय लगेगा। अदालत ने उन्हें एक महीने के लिए अमेरिका और यूक्रेन जाने की अनुमति दी। शर्तें यह हैं कि वे एनआईए की मांग पर वर्चुअल या शारीरिक रूप से जांच में शामिल होंगे, 24 घंटे में पता, मोबाइल नंबर और ईमेल देंगे तथा एक महीने बाद भारत लौटेंगे।
वैन डाइक को 18 सितंबर को और छह यूक्रेनियों हुर्बा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोवस्की, स्टेफंकिव मैरियन, होनचारुक मकसिम और कामिंस्की विक्टर को 23 सितंबर को डिफॉल्ट जमानत मिली थी। एनआईए ने आरोप लगाया था कि ये आरोपी म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों के लिए ड्रोन युद्ध प्रशिक्षण शिविर से जुड़े हैं।