फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली दंगा: हत्या के आरोप से सात बरी, निषेधाज्ञा उल्लंघन में दोषी

विज्ञापन
विज्ञापन
वीडियो साक्ष्य धुंधला, केवल एक गवाही पर आरोपियों को दोषी ठहराना उचित नहीं
विज्ञापन


संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान खजूरी चौक पर ऑटो चालक बाबू के साथ हुई मारपीट और उसकी मौत के मामले में अदालत ने सात आरोपियों को हत्या समेत गंभीर आरोपों से बरी कर दिया है। हालांकि, अदालत ने उन्हें निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया है। अदालत ने कहा कि पुलिसकर्मी की अकेली गवाही के आधार पर आरोपियों को जानलेवा हमले का दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, जब तक उसकी पुष्टि के लिए अन्य सबूत न हों। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने सात आरोपियों कुलदीप सिंह, हरजीत सिंह उर्फ हैप्पी, राहुल उर्फ अजय, सचिन रस्तोगी, भरत भूषण उर्फ लकी, संदीप उर्फ संजीव और धर्मेंद्र उर्फ धम्म को हत्या, घातक हथियारों से दंगा करने और विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ाने समेत अन्य आरोपों से बरी कर दिया। हालांकि, अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने का दोषी माना। यह निषेधाज्ञा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत लागू की गई थी। अभियोजन पक्ष ने घटना के वीडियो को भी सबूत के तौर पर पेश किया था। हालांकि, अदालत ने इसे बेहद खराब गुणवत्ता का पाया। न्यायाधीश ने कहा कि वीडियो में किसी का चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा था और उसे देखकर किसी व्यक्ति की पहचान करना लगभग असंभव था। वहीं, मामले के एक अन्य आरोपी सचिन गुप्ता उर्फ मोपी को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। अदालत ने दोषी ठहराए गए सात आरोपियों की सजा पर दलीलें सुनने के लिए मामले को बाद की तारीख पर सूचीबद्ध किया है।
विज्ञापन




प्रत्यक्षदर्शियों ने नहीं किया अभियोजन के दावे का समर्थन-
मामला 25 फरवरी 2020 का है। खजूरी चौक पर बाबू के साथ मारपीट हुई थी। दो दिन बाद जीटीबी अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि सहायक उपनिरीक्षक अनिल कुमार ने घटना अपनी आंखों से देखी थी। हालांकि, अन्य गवाहों ने अभियोजन पक्ष के दावे का समर्थन नहीं किया। अदालत ने कहा कि किसी भी गवाह की गवाही से यह साबित नहीं हुआ कि आरोपियों में से कोई भी घातक हथियार या किसी अन्य हथियार से लैस था। ऐसे में हत्या और अन्य गंभीर आरोपों में उन्हें दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे।
विज्ञापन





विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें