दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सीनियर सैनिटेशन सुपरवाइजर की बीती रात कोरोना संक्रमण से मौत हो गई। 52 वर्षीय सुपरवाइजर को यहां चार दिन पहले भर्ती कराया गया था। बताया गया कि वह ड्यूटी के दौरान हर तरह के एहतियात बरतते थे, लेकिन फिर भी संक्रमित हो गए।
उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था और रविवार शाम करीब 7:30 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। सूत्रों ने बताया कि वह एम्स के स्थाई कर्मचारी थे और प्रीमियर मेडिकल इंस्टीट्यूट के आउटडोर मरीज विभाग में तैनात थे।
उनके सहयोगियों का कहना है कि उन्होंने अपने पूरी नौकरीकाल में एक दिन भी छुट्टी नहीं ली, जब तक कि कोरोना ने उन्हें नहीं जकड़ लिया। हमेशा मुस्कुराते रहने वाले हीरा लाल की ड्यूटी ही कुछ ऐसी थी कि उन्हें डिसइंफेक्शन स्टाफ, सफाई कर्मचारियों और वार्ड ब्वॉय के संपर्क में रहना पड़ता था।
उनकी मृत्यु पर एम्स रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के महासचिव डॉ. श्रीनिवास राजकुमार टी ने ट्वीट कर शोक जताया। उन्होंने लिखा कि एक और कोरोना योद्धा ने देश की सेवा में अपना जीवन अर्पण कर दिया।
उन्होंने लिखा कि एम्स ने अपना गौरवशाली योद्धा खो दिया है। यह वायरस खतरनाक है, बहुत संचारी है। यह किसी को नहीं बख्शता है।
एम्स एससी/एसटी कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव कुलदीप ढिगान ने बताया कि सुपरवाइजर को बुखार और सांस लेने में हल्की समस्या हो रही थी, जिसके बाद उन्होंने 16 मई को एम्स में जांच कराई थी।
उनकी स्थिति कोरोना परीक्षण के मानदंडों को पूरा नहीं करती थी, इसलिए पहले उनका कोरोना परीक्षण नहीं किया गया। उन्होंने नियमित रक्त परीक्षण कराया, उनकी काउंसलिंग की गई और उन्हें सुरक्षा के लिए बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी देकर घर भेज दिया गया।
उन्होंने बताया कि 19 मई को हालत बिगड़ने के बाद उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। इसके बाद सांस लेने में समस्या होने के कारण उनकी कोरोना जांच की गई जिसमें संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद उन्हें ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया।
एम्स के जनरल सेक्रेटरी ने बताया कि वो लोग जिनकी हर तरह के संक्रमण की चपेट में आने की संभावना सबसे ज्यादा होती है उन्हें सुरक्षित करने के लिए तो सबसे पहले प्राथमिकता देनी चाहिए। हमारे यहां सैकड़ों सफाई कर्मी हैं जो लगातार संक्रमितों के संपर्क में हैं और उन्हें संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है।