आजकल ट्रेन में कंफर्म टिकट मिलना काफी मुश्किल भरा काम हो गया है। अमूमन माह भर पूर्व ही यहां टिकटों की बुकिंग हो जाती है। ऐसे में अगर किसी को दो-चार दिन बाद जाना पड़ जाए तो उसे वेटिंग में ही टिकट लेना पड़ता है।
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इसके बाद चिंता सताने लगती है कि यात्रा वाले दिन तक टिकट कंफर्म होगा या नहीं। उनकी इसी परेशानी के हल के लिए आईआईटी रुड़की से पासआउट तीन दोस्तों ने ट्रेनमैन नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया है।
ट्रेनमैन अपनी वेबसाइट www.trainman.in व ट्रेनमैन मोबाइल ऐप के जरिये लोगों को बताता है कि उनका टिकट कंफर्म होगा कि नहीं। इस वेबसाइट व मोबाइल ऐप पर रोजाना करीब दो लाख लोग विजिट करते हैं।
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ऐसे हासिल की जा सकती है जानकारी
- फोटो : अमर उजाला
ट्रेनमैन यात्रियों को उनकी ट्रेन के बारे में हर प्रकार की जानकारी मुहैया कराता है। इसके लिए उन्हें किसी प्रकार का शुल्क नहीं चुकाना पड़ता। इस स्टार्टअप का रजिस्ट्रेशन मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स में मार्च 2016 में हुआ है।
इसका संचालन गुड़गांव के गोल्फ कोर्स रोड स्थित कार्यालय से होता है। यात्री ट्रेनमैन वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर लॉग इन कर अपना पीएनआर नंबर डाल अपने टिकट के कंफर्मेशन के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं।
यहां यह भी पता चलता है कि ट्रेन का रनिंग स्टेटस क्या है। कितनी लेट है और किस प्लेटफार्म पर आएगी। टिकट को कैंसिल कैसे कराएं व टिकट पर कितना पैसा कटेगा, इसकी भी जानकारी दी जाती है।
इस वजह से शुरु हुआ ट्रेनमैन
- फोटो : pti
ट्रेनमैन के सीईओ विनीत कुमार चिरानिया बताते हैं कि वह जब दिल्ली से बिहार स्थित अपने घर नवगछिया भागलपुर, बिहार जाते थे तो उन्हें ट्रेन में टिकट के लिए काफी परेशान होना पड़ता था। कई बार वेटिंग टिकट लेकर घर तक का सफर करना पड़ता था।
जब वह आईआईटी रुड़की में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, तभी उन्हें आइडिया आया कि क्यों न कोई ऐसा प्लेटफार्म तैयार किया जाए, जिससे ट्रेन से सफर करने वालों की तमाम मुश्किलों से बचाया जा सके।
जब उन्होंने यह विचार अपने साथियों- मोहम्मद आमिर और करन से शेयर किया तो उन्हें भी यह पसंद आया, तभी ट्रेनमैन का खाका तैयार हो गया। करीब दो साल पहले इस पर काम शुरू किया गया था जो आज परवान चढ़ रहा है।
90 फीसदी सही होती है जानकारी
- फोटो : अमर उजाला
ट्रेनमैन के सीईओ विनीत ने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ मिलकर ट्रेनमैन को सफल बनाने के लिए भारतीय रेलवे में अपना सूत्र विकसित किया। इसी आधार पर ट्रेन में टिकट कंफर्म होगा कि नहीं, इसकी जानकारी यात्रियों को ट्रेनमैन प्रदान करता है।
विनीत का दावा है कि वेटिंग टिकट कंफर्म होने की जो भविष्यवाणी की जाती है वह करीब 90 फीसदी सही होती है। यही कारण है कि यात्रियों का ट्रेनमैन मोबाइल ऐप और वेबसाइट के प्रति रुझान बढ़ता जा रहा है।
गुड़गांव से ट्रेनमैन का सफर 50 हजार रुपये की पूंजी से शुरू हुआ था। इसका कारोबार शुरुआत में 30000 रुपये प्रति माह था। अब यह बढ़कर हर माह औसतन ढाई से तीन लाख रुपये प्रतिमाह के स्तर पर पहुंच गया है।
ट्रेनमैन के संस्थापकों का कहना है कि वह आने वाले दिनों में ट्रेनमैन वेबसाइट और मोबाइल ऐप की शुरुआत देश के अन्य भाषाओं में करने जा रहे हैं। अभी यह अंग्रेजी में है।
इनका कहना है कि देश भर से इसे अन्य भाषाओं में शुरू करने की मांग की जा रही है। जल्द ही यह हिंदी, मराठी और दक्षिण भारतीय भाषाओं में शुरू किया जाएगा। इसके लिए तैयार तैयार की जा रही है।
इन्होंने की ट्रेनमैन स्टार्टअप की शुरुआत
विनीत कुमार चिरानिया, एमटेक कंप्यूटर साइंस आईआईटी रुड़की, मूल निवासी बिहार
मोहम्मद आमिर एमटेक कंप्यूटर साइंस, आईआईटी रुड़की, मूल निवासी उन्नाव यूपी
करण कुमार, बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग आईआईटी रुड़की, मूल निवासी जालंधर