आतंकी संगठन आईएसआईएस की कमर तोडने के लिए चलाए गए संयुक्त अभियान में अहम भूमिका निभाने वाले फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के दौरे पर सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के हाथ पांव फूले हुए हैं।
खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों को उस संस्थान के वैज्ञानिकों पर भी विश्वास नहीं है जहां ओलांद का दौरा होने वाला है। हम बात कर रही है नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (एनआईएसई) में होने वाले ओलांद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम की।
केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने बांग्लादेश से इंटरसेप्ट हुई हिजबुल तहरीर नामक आतंकी संगठन की कॉल के बाद दौरे पर चौकसी इतनी बढ़ा दी है कि एनआईएसई के वैज्ञानिकों पर भी उन्हें विश्वास नहीं है। उनकी जांच-पड़ताल भी करवाई गई है। बताया गया है कि इसके महानिदेशक की भी सुरक्षा एजेंसियों ने पड़ताल करवा ली है।
यहां 40 सोलर रिसर्च साइंटिस्ट हैं, जो दुनिया के 121 सूर्यपुत्रों (जहां सौर ऊर्जा के दोहन की अपार संभावनाएं हैं) को पर्यावरण हितैषी सोलर एनर्जी पर काम करने का प्रशिक्षण देंगे और इस मामले में अग्रणी देशों से सीखेंगे। बताया गया है कि इन सभी वैज्ञानिकों की पुलिस वेरीफिकेशन हुई है।
रविवार को मेवात से हुई अलकायदा के आतंकी की गिरफ्तारी और इसके बाद आईएस से कनेक्शन रखने वाले चार आतंकियों की हरिद्वार से गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा और चौकस कर दी गई है। बताया गया है कि ये आतंकी दिल्ली-एनसीआर समेत कई जगहों पर बम धमाका करने की साजिश रच रहे थे।
ऐसे में कोई भी सुरक्षा और खुफिया एजेंसी ओलांद और पीएम मोदी की सुरक्षा में कोई चूक नहीं छोडना चाहती। मालूम हो कि अमेरिका की सेंट्रल इंटेलीजेंसी एजेंसी (सीआईए) भी ओलांद के दौरे पर गृह मंत्रालय के जरिए सुरक्षा इनपुट ले रही है।