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स्कूलों, अस्पतालों पर भी टैक्स..भुगतेंगे आप ही

Thu, 04 Jun 2015 10:24 AM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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हंगामे के बीच बुधवार को हुई नगर निगम बैठक में प्राइवेट स्कूलों, अस्पतालों और फार्म हाउस पर शिकंजा कसने का प्रस्ताव पास किया गया। नगर निगम अब स्कूलों, अस्पतालों और फार्म हाउस को टैक्स में छूट नहीं देगा।
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इनसे कामर्शियल टैक्स वसूला जाएगा। इसका सीधा असर शहर की जनता पर ही पड़ेगा। यह कामर्शियल टैक्स वर्तमान वित्तीय वर्ष से ही वसूला जाएगा।

निगम के इस निर्णय से शहर के करीब 150 से ज्यादा स्कूल और 1000 से ज्यादा अस्पताल, नर्सिंग होम, पैथोलॉजी लैब, 100 से ज्यादा फार्म हाउस और 80 प्रोफेशनल कॉलेज प्रभावित होंगे। टैक्स की रकम चार गुना तक बढ़ जाएगी।

दरअसल, निगम एक्ट में ऐसे स्कूलों, अस्पतालों को संपत्ति कर की छूट देने का प्रावधान है जो निशुल्क या चैरिटेबल शिक्षा और चिकित्सा मुहैया कराते हैं। शहर में 95 फीसदी से ज्यादा स्कूल, अस्पताल निशुल्क सेवा नहीं कर रहे।
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स्कूलों में हर साल 20 से 30 फीसदी फीस बढ़ा दी जाती है। पार्षदों का तर्क है कि शिक्षा और चिकित्सा को महंगा व्यवसाय बना देने वाले लोगों को नगर निगम अब रियायत नहीं देगा।

ऐसे में निगम सदन के सभी पार्षद इस मुद्दे पर एकमत हो गए कि स्कूलों, अस्पताल के साथ-साथ फार्म हाउस से भी कामर्शियल टैक्स वसूला जाएगा। ध्वनिमत से पास हुए इस प्रस्ताव को इसी वित्तीय वर्ष से लागू किया जाएगा।

ऐसे पड़ेगा असर
अभी तक स्कूलों और अस्पतालों से संपत्ति कर नहीं वसूला जाता। इनसे केवल 10 फीसदी वाटर टैक्स और 4 फीसदी सीवर टैक्स वसूला जाता है। निगम बोर्ड के इस नए निर्णय के बाद इनसे 10 फीसदी संपत्ति कर भी वसूला जाएगा और नई कामर्शियल टैक्स पॉलिसी के मुताबिक आवासीय दरों का 3 से 5 गुना तक टैक्स वसूला जाएगा।

स्कूल बोले-हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रहा है निगम
निगम एक्ट में स्कूलों को टैक्स में छूट देने का प्रावधान है। हाईकोर्ट ने भी करीब 10 साल पहले इस मामले में डायरेक्शन जारी किया हुआ है। निगम कामर्शियल टैक्स नहीं लगा सकता। यह हाईकोर्ट के आदेश और निगम एक्ट का उल्लंघन होगा। - सुभाष जैन, चेयरमैन, इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन ऑफ गाजियाबाद

अफसर देंगे सर्वे की पुरानी रिपोर्ट
अवैध कालोनियों के मकानों को टैक्स के दायरे में लाने के लिए सर्वे कराने के नगर आयुक्त के निर्णय को फिलहाल बोर्ड ने रोक दिया है। बोर्ड का कहना है कि वर्ष 2010 में निगम ने शहर भर में प्रॉपर्टियों का सर्वे कराया था। इसकी रिपोर्ट पहले सदन के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

समान टैक्स पर किया विरोध
पार्षदों ने पॉश कालोनी और मलिन बस्तियों में समान टैक्स लगाने का विरोध किया। पार्षद बाबू सिंह आर्य ने कहा कि कालोनियों को सुविधाओं के हिसाब से श्रेणी में बांटकर उसी के आधार पर टैक्स निर्धारण किया जाए। राजनगर के बराबर मलिन बस्तियों पर टैक्स नहीं लगाया जाएगा।

अस्पताल बोले-मरीजों पर पड़ेगा टैक्स का बोझ
पहले से ही अस्पतालों पर कई तरह के टैक्स लगाए जा रहे हैं, अब नगर निगम कामर्शियल टैक्स वसूलेगा तो इसका बोझ मरीजों पर ही बढ़ेगा। निगम का यह निर्णय अस्पतालों और मरीजों के लिए सही नहीं है। - पीएन अरोड़ा, मैनेजिंग डायरेक्टर, यशोदा अस्पताल

‘एक महीने में काम न हुआ तो दूंगी इस्तीफा’
लगभग एक साल से ठप पड़े विकास कार्यों पर सदन में पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा। बैठक की कार्यवाही शुरू होते ही लाजपतनगर की पार्षद कुमकुम चौधरी ने अफसरों के खिलाफ मोर्चा थाम लिया।

उन्होंने कहा कि 250 मीटर लंबी सड़क के लिए उनके पति ढाई महीने से धरने पर हैं और अन्न व नमक त्याग रखा है। अफसरों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।

अन्य पार्षदों ने उनका समर्थन किया और देखते ही देखते सदन में हंगामा हो गया। नगर आयुक्त अब्दुल समद ने वक्त की नजाकत को देखा और मामले को खुद संभाला।

उन्होंने पार्षद पति अनिल चौधरी को धरने से उठवाने के निर्देश दिए और जल्द ही सड़क निर्माण कराने का आश्वासन दिया।

उधर, पार्षद कुमकुम चौधरी ने चेतावनी दी कि एक महीने में सड़क निर्माण नहीं हुआ तो वे ऐसे निगम की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगी जो जनता के काम भी न करा सके।
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