लंबे समय बाद शुरू हुए दिल्ली में नर्सरी एडमिशन पर एक बार फिर रोक लग गई है। इस बार सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई है।
चार बार सुनवाई आगे बढ़ाने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 अप्रैल को एडमिशन बहाल कर दिए थे और 9 अप्रैल तक सभी को एडमिशन करा लेने को कहा था। वहीं 15 अप्रैल से कक्षाएं भी शुरू होने की बात की गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर इस पर रोक लगा दी।
27 फरवरी को स्कूलों ने नर्सरी एडमिशन को लेकर लिस्ट जारी की थी। हाईकोर्ट ने उन अभिभावकों को जिनके बच्चों का नाम दो या दो से अधिक स्कूलों में नाम निकला है वह 9 अप्रैल से पहले किसी एक स्कूल में अपने बच्चों का एडमिशन कराने की हिदायत दी थी।
कहां उलझा मामला?
दरअसल, दिसंबर में तत्कालीन केजरीवाल सरकार ने इस बार नर्सरी एडमिशन की गाइडलान में फेरबदल किए थी। लेकिन उनकी सरकार जाने के बाद उनके द्वारा किए गए बदलावों में फिर से मॉडिफिकेशन किया गया। इससे मामला उलझ गया और जिनको दाखिला मिल चुका था उन्हें भी फिर से दाखिला कराने की नौबत आ गई।
मामले में अभिभावकों ने उप-राज्यपाल की ओर से जारी की गई नई एडमिशन गाइडलाइंस को चुनौती दी थी। प्वाइंट सिस्टम मामले पर निजी स्कूलों और अभिभावकों के बीच चल रहे इस विवाद पर फैसला नहीं हो पा रहा है।
इस मामले में हाईकोर्ट में लंबे समय तक सुनवाई टलती रही लेकिन 3 अप्रैल को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया और एडमिशन बहाल कर दिए।
सुप्रीम कोर्ट का क्या है मानना?
सुप्रीम कोर्ट पहले तो नर्सरी एडमिशन पर रोक लगाने से मना कर चुका है। लेकिन इंटर स्टेट प्वाइंस सिस्टम से उलझे विवाद को पूरी खत्म कराने के पक्ष में है। इसीलिए शुक्रवार को इस पर अंतरिम रोक लगाने का निर्देश दे दिया।
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार मामले का हल निकाल कर नर्सरी में एडमिशन प्रॉसेस जरूर शुरू होने चाहिए। लेकिन बात मामले का हल निकालने पर ही टिकी है।
हाईकोर्ट ने एडमिशन से संबंधित कुछ बहुत अहम फैसले दिए थे, जिनके अनुसार 9 अप्रैल तक नर्सरी एडमिशन प्रॉसेस पूरे हो जाने चाहिए थे। साथ ही 16 अप्रैल को अभी एक एक और अहम सुनवाई होनी बाकी है।