बेटियों से एक नहीं दो-दो परिवार बनते हैं। यह जननी है, जो समाज को सुगठित कर उसे सही दिशा देती है। यह ऐसी कली है, जो दुनिया की फुलवारी महकाती है।
नेहरू, गांधी, सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद को जन्म देने वाली मां ने बेटी के रूप में ही जन्म लिया था। यदि वह न जन्मीं होती तो देश के वीर सपूत भी न होते। इससे देश की तस्वीर कुछ अलग ही होती। ऐसे में 21वीं सदी में भी बेटे और बेटी के बीच अंतर क्यों है, यदि समाज अब न जागा तो देर हो जाएगी।
अमर उजाला बेटी ही बचाएगी अभियान के तहत शहर में बृहस्पतिवार को भी नुक्कड़ नाटक के जरिए शहर के लोगों को बेटी बचाने का संदेश दिया गया। संकल्प इंडिया चैरिटेबल ट्रस्ट और नोएडा राजकीय डिग्री कालेज के छात्रों ने चौधरी मॉल, पुराने बस अड्डे और जीडीए परिसर में अपने अभिनय से लोगों को जागरूक किया।
कलाकारों ने अभिनय सेे बताया कि किस तरह उच्च शिक्षित और कुलीन वर्ग में भी बेटे की चाहत रखने वाले लोग कोख में ही भ्रूण हत्या कराने पर आमादा हो जाते हैं। मंचन देख भीड़ ने जमकर तालियां बजाईं। कलाकार साक्षी, मनीष, हिमांशु, उदित, गौरव, शिखा, भावना ने बेहतर अभिनय कर तालियां बटोरी।