केंद्र सरकार के नकारात्मक रवैये के कारण बिना दस्तावेज के भारत आया सऊदी अरब का नागरिक मोहम्मद अब्दुल अजीज सात साल से तिहाड़ में बंद है। इस पर नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि आखिर उसे वापस क्यों नहीं भेजा जा रहा।
कोर्ट ने जेल अधीक्षक को भी पूरे दस्तावेजों के साथ पेश होने को कहा है। न्यायमूर्ति पीके भसीन और न्यायमूर्ति जेआर मिड्ढा की खंडपीठ ने तिहाड़ जेल अधीक्षक को यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि जब याची पर आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने का कोई आरोप नहीं है तो उसे उच्च सुरक्षा वार्ड में क्यों रखा गया है।
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यह काफी गंभीर मामला है कि याची को सजा पूरी होने के बाद भी सऊदी अरब नहीं भेजा जा रहा। अदालत ने केंद्र सरकार को 26 फरवरी तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा यह भी बताने को कहा है कि आखिर ऐसे कितने विदेशी जेल में है।
कोर्ट ने इस मामले में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को भी पेश होकर अदालत की सहायता का आग्रह किया है। याची को वर्ष 2005 में श्रीनगर में बिना पासपोर्ट और वीजा के गिरफ्तार किया गया था। श्रीनगर स्थित अदालत ने उसे अप्रैल 2006 में विदेशी अधिनियम के तहत एक वर्ष कैद की सजा सुनाई थी।
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सजा पूरी होने के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने उसे सऊदी अरब वापस भेजने के लिए तिहाड़ जेल स्थानांतरित कर दिया था। तभी से वह जेल में बंद है। अब याची ने हाईकोर्ट को पत्र लिखकर आपबीती बताई। कोर्ट ने पत्र पर संज्ञान लेकर सुनवाई आरंभ कर दी।
सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर सरकार के अधिवक्ता ने खंडपीठ के समक्ष 11 दस्तावेज पेश कर बताया कि समय-समय पर केंद्र सरकार को पत्र लिखकर याची को वापस भेजने का आग्रह किया, बावजूद इसके कोई जवाब तक नहीं मिला। उन्होंने कहा कि याची के पास पासपोर्ट और वीजा नहीं होने के कारण उसे हिरासत में रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।