दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का कहना है कि राजधानी में कोरोना संक्रमित मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। सोमवार को उन्होंने 30 और 31 दिसंबर की जीनोम सीक्वेंसिंग रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हुए बताया कि 81 फीसदी लोगों में ओमिक्रॉन वैरिएंट मिला है। यानी, कोरोना संक्रमित 187 मरीजों में से 152 में ओमिक्रॉन की पुष्टि हुई है। बाकी 35 सैंपल में डेल्टा व अन्य वैरिएंट मिले हैं। डेल्टा संक्रमितों की संख्या 9 फीसदी है। डेल्टा वैरिएंट कई महीनों से दिल्ली में है और इसी वैरिएंट की वजह से बीते साल अप्रैल से मई के बीच कोरोना महामारी की घातक लहर आई थी। इसी के साथ राजधानी में ओमिक्रॉन संक्रमितों की संख्या 403 हो गई है। इनमें 95 मरीजों को छुट्टी मिल चुकी है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राजधानी में दैनिक मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है। ज्यादा लोगों में गंभीर लक्षण नहीं हैं या उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं पड़ रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने दिल्ली विधानसभा में कहा कि तीन प्रयोगशालाओं से मिली 30-31 दिसंबर की जीनोम सीक्वेंसिंग रिपोर्ट के अनुसार 81 प्रतिशत सैंपल में ओमिक्रॉन की पुष्टि हुई है। दिल्ली में अधिकतर मामले ओमिक्रॉन से ही जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि वसंतकुंज स्थित यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान (आईएलबीएस), लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की लैब में जीनोम सीक्वेंसिंग हो रही है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि एक सप्ताह में मामले काफी बढ़ेंगे, लेकिन अभी यह एक अनुमान है।
दिल्ली सरकार कोरोनो संक्रमितों की ट्रेकिंग-ट्रेसिंग में विफल
नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कोरोना को लेकर दिल्ली सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने फिर से कोरोना फैलने और उसके बाद की स्थिति के लिए आप सरकार को कटघरे में खड़ा किया। बिधूड़ी ने कहा कि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने खुद माना है कि विदेश से आने वाले लोगों के घर जाने के पांच-सात दिन बाद दोबारा जांच करने पर उनमें ओमिकॉन की पुष्टि हो रही है। इससे ओमिक्रॉन के सामुदायिक प्रसार की आशंका है। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसका मतलब यह नहीं है कि दिल्ली सरकार ने विदेश से आने वालों पर नजर नहीं रखी। क्या दिल्ली सरकार ट्रेकिंग और ट्रेसिंग करने में पूरी तरह विफल रही है और उसी का नतीजा है कि कोरोना फिर से फैल रहा है। उ
न्होंने पूछा कि दिल्ली के बाजारों में बेतहाशा भीड़ उमड़ रही है। आखिर दिल्ली सरकार की मशीनरी क्या कर रही है। सरकार को इस पर जवाब देना होगा कि मुख्यमंत्री यह कह रहे हैं कि कोरोना बहुत माइल्ड है। क्या इस रवैये से जनता में लापरवाही की भावना नहीं बढ़ रही है। उन्होंने पूछा कि दिल्ली सरकार ने येलो अलर्ट के तहत राजधानी में मेट्रो और बसों में यात्रा करने के लिए 50 फीसदी क्षमता की ही अनुमति दी है, ऐसे में लोग कामकाज पर कैसे पहुंचे। मेट्रो स्टेशनों पर लंबी लाइनें लग रही हैं, जिनमें सामाजिक दूरी जैसे नियमों का उल्लंघन हो रहा है। सार्वजनिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है बावजूद इसके सरकार ने एक भी बस नहीं खरीदी।
कोरोना, बेरोजगारी और महंगाई पर चर्चा करे सरकार
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से दो दिनों के विशेष विधानसभा सत्र में दिल्ली के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की मांग की है। कांग्रेस कोविड संक्रमण में तेजी से हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए जनता के स्वास्थ्य और उनके हितों से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा की मांग कर रही है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी ने कहा कि विधानसभा सत्र में कोरोना के बढ़ते मामलों, नई आबकारी नीति, महंगाई, बेरोजगारी, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था, मोहल्ला क्लीनिकों में गलत दवाइयों से हुई बच्चों की मौत सहित किसानों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन इन सब पर चर्चा न कर खानापूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की जनता के हितों पर ध्यान देना चाहिए। जनता के प्रति सरकार की निष्क्रियता के कारण कोविड मामले में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। शराब की दुकानों को छोड़ अधिकतर गतिविधियों की क्षमता 50 प्रतिशत कर दी गई है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि शराब नीति के खिलाफ चक्का जाम करना महज दिखावा है। भाजपा और केजरीवाल दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू है, जो मिलकर दिल्ली की जनता को गुमराह कर रहे है।