राजकुमार सुल्तान के मरने की झूठी खबर मिलने पर निहालदेही चिता में बैठकर सती हो गई थी। सती होने के बाद निहालदेही की याद में सुल्तान ने कासना में मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर के अवशेष अब भी मौजूद हैं। ग्रेटर नोएडा के कासना के राजा मघ की बेटी निहालदेही का इंद्रगढ़ी के राजकुमार सुल्तान से प्रेम चल रहा था।
सुल्तान एक साल के लिए ढोला के राजा के पास गया था। लेकिन राजा ने उसे अपने पास रख लिया। वहां पर छह साल बीत गए। छह साल बीतने पर निहालदेही ने ढोला में सुल्तान को पत्र भेजा जिसमें लिखा था अगर वह तीज के दिन तक वापस कासना नहीं आया तो नौबाग में वो सती हो जाएगी।
जब सुल्तान को सूचना मिली तो तीज के लिए केवल तीन दिन शेष रह गए थे। सुल्तान को तीन दिन में साढे़ सात किलोमीटर की दूरी तय करनी थी। तीज से पहले सावन माह में निहालदेही कासना में नौबाग में पेड़ पर झूला झूलती थी। वो सुल्तान का इंतजार वहीं पर करने लगी।