‘यह मेरे घर, मेरे देश का मसला है। मुझे मेरे देश और यहां की कानून व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। इस मुद्दे पर राजनीति हो रही है। घर के मसले घर में ही सुलझें, तो ही बेहतर है।’
यह कहना है इकलाख के बेटे सरताज का। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से भी उन्हें इंसाफ का आश्वासन मिला है। घटना के राजनीतिक तूल पकड़ने और मुद्दे को यूएन में ले जाने की बात पर इकलाख के परिवार को निराशा हुई है।
सरताज ने कहा कि अगर यूएन जाने से इसका समस्या का स्थायी हल निकलता तो यूएन क्या चांद पर भी जाना चाहिए। उनका परिवार मानसिक परेशानियों के दौर से गुजर रहा है। उनके लिए भाई दानिश और अन्य परिजनों की सलामती आवश्यक है।
सरताज ने की ट्रांसफर की मांग
सरताज ने परिवार के देखभाल करने के लिए अपने ट्रांसफर की मांग की है। उन्होंने वायुसेना के अधिकारियों से गाजियाबाद या दिल्ली में ट्रांसफर कराने की मांग की है। वो अपने परिवार और भाई दानिश के साथ रहना चाहते हैं ताकि उनका ख्याल रख सकें।
सरताज ने गांव वापस जाने से जुडे़ सवालों पर कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनके परिवार के साथ कभी ऐसा हादसा होगा। गांव के अधिकतर लोग अच्छे हैं। बस चंद गलत लोगों की शह पर इस घटना को अंजाम दिया गया। उनका भरोसा टूटा है, इसे जुड़ने में वक्त लगेगा।
दानिश की हालत में सुधार हो रहा है। बुधवार को दानिश ने खाना खाया और लोगों से भी खाने के लिए पूछा। डॉ. वरुण भार्गव ने बताया कि दानिश की हालत में सुधार जारी है। हालांकि, अब भी वह खतरे से बाहर नहीं है। वे कुछ ब्लड रिपोर्ट्स का इंतजार कर सब ठीक रहा तो कल दानिश को वार्ड में शिफ्ट करने पर विचार किया जाएगा। बुधवार को स्टाफ की मदद से दानिश को अस्पताल के अंदर चलाया भी गया।
दानिश की मेमोरी हमेशा के लिए हो सकती है लॉस
सिर में चोट लगने का असर दानिश की याददाश्त पर पड़ा है। उन्हें वर्षों पहले की बात तो याद है, लेकिन बिसाहड़ा की हालिया घटना को वह भूल गए हैं।
सरताज ने बताया कि चोट की वजह से दानिश की याददाश्त कमजोर हो गई है। उसे सदमा न लगे, इसलिए वे उसे कुछ भी याद दिलाने की कोशिश भी नहीं कर रहे हैं।
डॉक्टरों ने बताया कि दानिश कुछ बातों को हमेशा के लिए भी भूल सकता है। वहीं, डॉ. वरुण भार्गव ने कहा कि दानिश परिवार से बात कर रहा है लेकिन पुलिस का बयान अभी जल्दबाजी होगा।