तिहाड़ की पूर्व महानिदेशक विमला मेहरा के ड्रीम प्रोजेक्ट ओपन जेल का सपना आज भी तिहाड़ व रोहिणी जेल में बंद कैदियों के लिए दूर की कौड़ी ही है।
ओपन जेल के लिए जो नियम और शर्तें बनाई गई हैं, उन्हें वर्तमान में जेल में बंद कोई भी कैदी पूरा नहीं कर पा रहा है। इस पर तिहाड़ प्रशासन ने ओपन जेल के नियम-शर्तों में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है। उपराज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद ओपन जेल की शर्तें आसान हो जाएंगी।
तिहाड़ प्रशासन की ओर से प्रस्ताव में कहा गया है कि ओपन जेल के लिए तीन पैरोल की जगह एक पैरोल, तीन फरलो की जगह एक फरलो और सेमी ओपन जेल में दो साल की जगह एक वर्ष रहने वाले कैदियों को भी ओपन जेल का लाभ मिले।
यह प्रस्ताव उपराज्यपाल को भेजा गया है। प्रस्ताव पर मंजूरी मिलने के बाद ओपन जेल का लाभ कैदियों को मिल सकेगा। तिहाड़ जेल के कानून अधिकारी सुनील गुप्ता ने प्रस्ताव भेजे जाने की पुष्टि की है।
वर्तमान शर्तों के अनुसार ओपन जेल का लाभ उन्हीं कैदियों को मिल सकता है जिन्हें जेल में रहने के दौरान तीन बार पैरोल और इतनी ही बार फरलो मिली हो। यही नहीं दो वर्ष से जो कैदी सेमी ओपन जेल में है वही ओपन जेल का हकदार होगा।
जेल से बाहर जा सकेंगे
ओपन जेल का लाभ जिन कैदियों को मिलेगा वे काम करने के लिए बाहर जा सकेंगे और फिर शाम में वापस जल लौट आएंगे। तिहाड़ में सेमी ओपन जेल की शुरुआत 11 जून-2013 को हुई थी। सेमी ओपन जेल के कैदी तिहाड़ मुख्यालय में काम करते हैं और मुख्यालय के नजदीक बने क्वाटर में ही रहते हैं। वर्तमान में सेमी ओपन जेल में करीब 60 कैदी हैं।