अब तक हम कोर्ट केस के मामले में लेटलतीफी के मामले सुनते थे। कुछ इसी तरह का हाल अब आरटीआई आवेदकों का होने लगा हैं। गरीब तबके की तीन महिलाओं की पेंशन बिना बताए रोक दी गई। पैसे के अभाव में उनका इलाज रुक गया।
पेंशन रुकने का कारण विभाग ने वक्त पर आरटीआई से भी नहीं बताया। महीनों तक जानकारी की आस में बैठीं इन महिलाओं की मौत हो गई। ये तीनों महिलाएं दिल्ली के झुग्गी क्षेत्र लाल गुम्बद कैम्प की थीं। एक्ट के तहत इस तरह के मामले जीवन औैर स्वतंत्रता से जुड़े होते हैं। इनका जवाब हर हाल में 48 घंटे में देना होता है।
55 वर्षीय धर्मो की विधवा पेंशन जुलाई 2013 में बिना सूचना दिए रोक दी गई थी। अस्थमा से पीड़ित धर्मो ने एक साल बाद आरटीआई फाइल कर जवाब मांगा। इस बीच धर्मो का अस्थमा का इलाज रुक गया। तमाम जद्दोजहद के बाद हालांकि उन्हें पूरी पेंशन मिल तो गई लेकिन उनकी मौत के चंद दिन पहले ही। जनवरी 2016 में उनकी अस्थमा से मौत गई।