कपड़े, आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक सामान की बढ़ी मांग, गरबा परिधानों के विदेशों से मिले 86 ऑर्डर
किराना कारोबार में लगभग 12 और सोने-चांदी के व्यापार में 10 प्रतिशत की वृद्धि
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। नवरात्र, रामलीला, गरबा, डांडिया और दशहरे के उत्सव ने इस बार नोएडा के बाजारों में कारोबार को नई रफ्तार दी। कारोबारियों का अनुमान है कि पितृपक्ष के बाद दस दिनों तक चली त्योहारी खरीदारी के दौरान शहर के बाजारों में करीब 1200 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। कपड़े, सोने-चांदी के आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक सामान, पूजा सामग्री और मिठाइयों की मांग में तेजी रही।
सेक्टर-18 मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष और नोएडा ज्वेलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव सुशील कुमार जैन के मुताबिक, पिछले नवरात्र की तुलना में इस वर्ष कारोबार में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। त्योहारी सीजन में लोगों ने साड़ी, लहंगे, कुर्ते और अन्य पारंपरिक परिधानों की जमकर खरीदारी की।
सोने-चांदी के आभूषणों और सिक्कों की मांग भी बढ़ी। वहीं, मोबाइल, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिक्री में तेजी रही। पूजा सामग्री, फल-फूल, नारियल, दीपक, बाती, मिठाई, नमकीन और सजावटी सामान की दुकानों पर भी ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी। रामलीला और अन्य आयोजनों के चलते पंडालों के लिए टेंट की मांग में भी इजाफा हुआ।
सुशील कुमार जैन के अनुसार, त्योहारी सीजन में किराना और रोजमर्रा के सामान के कारोबार में करीब 12 प्रतिशत, सोने-चांदी और आभूषणों में 10 प्रतिशत तथा इलेक्ट्रॉनिक और बिजली के सामान में आठ प्रतिशत की वृद्धि हुई। तैयार कपड़ों और उपहार की वस्तुओं के कारोबार में सात-सात प्रतिशत, जबकि घर की सजावट, फर्नीचर, मिठाई और नमकीन के कारोबार में करीब पांच-पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और रोमानिया से मिले ऑर्डर
नवरात्र की गरबा नाइट्स में गुजराती पारंपरिक वेशभूषा चणिया-चोली का आकर्षण इस बार विदेशों तक पहुंचा। रंग-बिरंगी कढ़ाई, मिरर वर्क और घेरदार स्कर्ट वाले परिधानों की मांग के चलते नोएडा की महिला उद्यमियों को अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और रोमानिया से कुल 86 सेट के ऑर्डर मिले। सेक्टर-71 निवासी जिज्ञासा आर्या ने बताया कि इनमें अमेरिका से 42, ब्रिटेन से 24, ऑस्ट्रेलिया से 12 और रोमानिया से आठ सेट के ऑर्डर शामिल हैं। चणिया-चोली के एक सेट की कीमत 3500 से 12 हजार रुपये तक है, जबकि कस्टम डिजाइन वाले परिधानों की कीमत 15 हजार रुपये तक पहुंचती है।
महिला उद्यमी बोलीं-दिल खुश...
हमनें तीन साल पहले अपना बुटीक शुरू किया था, यहां से विदेश में रहने वाले भारतीय पहले ऑर्डर देते थे, अब विदेशियों से भी ऑर्डर मिल रहे हैं।-जिज्ञासा आर्या, सेक्टर 71
सिर्फ वेस्टर्न ही नहीं, गुजराती पारंपरिक वेशभूषा की भी मांग आई है, जो अगले चार पांच दिन में ऑर्डर पहुंच जाएंगे।-शैली कालरा, सेक्टर 121
हम लखनवी चिकनकारी सूट का निर्यात करते हैं। इसकी मांग विदेश में रह रहे भारतीय करते हैं।-निधि जैन, सेक्टर 108
गर्व है कि विदेशी भी भारतीय परंपरा वेशभूषा के मुरीद हो रहे हैं, सोशल मीडिया परंपरा को विदेशों तक पहुंचाने में सबसे महत्वपूर्ण रहा।-विमला बाथम, सेक्टर 58,
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