गंगा स्नान के बाद गढ़ से श्रद्धालुओं के लौटने का सिलसिला शुरू हुआ तो एनएच-24 जाम हो गया। गढ़ संपर्क मार्गों पर भी जाम लग गया। करीब 16 घंटे तक वाहन भीषण जाम में फंसे रहे।
जाम को देखते हुए एनएच-24 पर रूट डायवर्जन 8 नवंबर तक रहेगा। दिल्ली से गढ़ की ओर जाने वाले वाहनों को मसूरी से धौलाना की ओर डायवर्ट किया जा रहा है। लेकिन पुलिस और प्रशासनिक अफसरों का दावा है कि शुक्रवार से ही हाईवे पर सफर करने वालों को राहत मिल जाएगी।
गढ़ गंगा मेला से वापसी की भीड़ अब परिवहन निगम के लिए भी चुनौती बन गई है। एनएच 24 पर यात्रियों की संख्या के हिसाब से ज्यादा बसों का संचालन करना पड़ेगा।
कार्तिक पूर्णिमा के मुख्य स्नान के बाद खादर मेले से श्रद्धालुओं का रेला चला तो हर रास्ते पर भीषण जाम लग गया। बीती शाम छह बजे से लगा जाम गुरुवार सुबह 10 बजे खुला, लेकिन वाहन दौड़ने की बजाय रेंगते नजर आए।
हाईवे पर जाम लगने से दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा समेत विभिन्न महानगरों से ब्रजघाट के शहरी मेले को आ रहे भक्तों को आवागमन में भारी दिक्कतें झेलनी पड़ीं।
मेले में पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को निजी वाहन स्याना चौपला के पास छोड़कर कर 7 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। एनएच-24, गढ़-चोपला, मेरठ और बुलंदशहर रोड पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। भैंसा-बुग्गी, ट्रैक्टर-ट्राली, टैंपो, कार, बस, बाइकों की लंबी लाइनें लग गईं।
दूसरे दिन भी टोल प्लाजा पर वसूली बंद रही
बुधवार को हाईवे पर श्रद्धालुओं की भीड़ के चलते पुलिस-प्रशासन ने टोल प्लाजा पर वसूली पूरी तरह बंद करा दी थी, जो बृहस्पतिवार को लगातार दूसरे दिन भी चालू नहीं हो पाई है।
जाम बना रोडवेज के लिए चुनौती
एनएच 24 पर जाम की वजह से गढ़मुक्तेश्वर की 70 किमी की दूरी तय करने में रोडवेज बसों को पांच से सात घंटे का समय लग रहा है। गंगा स्नान को चलने वाले वाहनों के अलावा अन्यों को बुलंदशहर व मेरठ होकर निकाला जा रहा है।
ऐसे में बसें समय से बस अड्डे पर नहीं पहुंच पा रही हैं। जाम में फंसी बसों में ज्यादा डीजल खर्च होने से विभाग को आर्थिक चपत भी लग रही है। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि शुक्रवार को भी जाम से राहत मिलने की उम्मीद कम ही हैं।
ट्रेनों में रही जबरदस्त भीड़
गढ़ गंगा से स्नान कर लौट रहे लोगों की ट्रेनों में भी जबरदस्त भीड़ रही। मुरादाबाद की ओर से आने वाली ट्रेनों के स्टॉपेज गढ़ में दिए जाने से यात्रियों को बड़ी सहूलियत मिली।
जाम के डर से अधिकांश लोगों ने ट्रेनों से सफर करना बेहतर समझा। ऐसे में गढ़ की ओर से आने वाली सभी ट्रेनें फुल रही। जनरल कोच में सीट मिलना तो दूर पैर रखने तक की जगह नहीं मिली।
यात्रियों को ट्रेनों के दरवाजों पर लटककर सफर करना पड़ा। वहीं हापुड़ शटल भी बृहस्पतिवार को यात्रियों से खचाखच भरी रही।