कोर्ट ने की जमानत मंजूरी पर टिप्पणी
जानकारी के लिए बता दें कि कोर्ट ने गुरुवार को छह बार के भाजपा सांसद बृज भूषण को नियमित जमानत दे दी और विनोद तोमर की जमानत याचिका भी मंजूर कर ली। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट हरजीत सिंह जसपाल ने नौ पेज के आदेश में ये टिप्पणियां कीं, जो शुक्रवार को सामने आईं। टिप्पणी में कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर हैं। मेरे विचार में। आरोपों की गंभीरता, इसमें कोई संदेह नहीं है। जमानत आवेदनों पर विचार करते समय प्रासंगिक विचारों में से एक है। लेकिन यह निर्णय लेने के लिए एकमात्र परीक्षण या कारक नहीं है। जब विचाराधीन कैदियों को अनिश्चित काल के लिए जेल में हिरासत में रखा जाता है, तो संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन होता है।
कोर्ट ने कहा कि उन्होंने जांच में सहयोग किया
उन्होंने आगे कहा कि इस मामले में मेरी सुविचारित राय में इस स्तर पर आरोपी व्यक्तियों को हिरासत में लेने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा। अदालत ने कहा कि सिंह और तोमर पर छेड़छाड़/यौन उत्पीड़न का आरोप था, जिसमें अधिकतम सजा सात साल कैद की थी। आगे कहा कि जांच के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने जांच में सहयोग किया। किसी भी स्तर पर जांच एजेंसी ने अतिरिक्त लोक अभियोजक के माध्यम से बोलते हुए यह आशंका व्यक्त नहीं की है कि आरोपी व्यक्ति अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास कर रहे हैं।