रमजान के मुकद्दस महीने का आखिरी अशरा यानी जहन्नुम से खलासी के दस दिन शुरू हो गए। रविवार से मोमिन बंदे मस्जिदों में एतकाफ के लिए बैठेंगे।
अन्तिम अशरा रविवार से शुरू हो गया है।
आज 20 वां रोजा है और अस्र की नमाज के बाद से विभिन्न मस्जिदों में रोजेदार एतकाफ शुरू करेंगे और ईद का चांद देखने के बाद ही मस्जिद से बाहर निकलेंगे। काबिलेगौर है की माहे रमजान का तीसरा और अंतिम अशरा रविवार से शुरू हो गया है। रमजान महिनें में दस रोजों का एक अशरा होता है।
पहला अशरा रहमत का, दूसरा बरकत और तीसरा मगफिरत का। रमजान के तीसरे अशरे में पांच रातें खास अहमियत रखती हैं। इस महीने में एक रात शबे कद्र होती है। शबे कद्र के बारे आया है कि इस पाक रात की तलाश करो। इनमें 21 वीं, 23 वीं, 25 वीं, 27 वीं और 29 वीं रात में से कोई एक रात शबे कद्र होती है।
यह बहुत ही अजमत वाली मुकद्दस रात है। शबे कद्र की इबादत हजार महीने की इबादत से बेहतर है । खासकर 27 वीं रात को शबे कद्र की खास रात माना गया है।
इन पांच रात में कुरआन की तिलावत खास तौर से की जाती है। रविवार को क्षेत्र की मस्जिदों में रोजेदार एतकाफ में बैठे। एतकाफ में बैठे ऐसे रोजेदार अब ईद का चांद दिखने के बाद ही मस्जिद से बाहर आएंगे। इससे पहले बाकी रोजों में वे दिन रात मस्जिद में ही रहकर इबादत करेंगे।