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Delhi NCR News: रास्ते बंद, बसें लेट, इंटरनेट ठप... प्रदर्शन ने थाम दी लुटियंस दिल्ली की रफ्तार

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बैरिकेडिंग और सुरक्षा जांच से यातायात बाधित, ऑनलाइन सेवाएं ठप होने पर ऑटो चालकों ने वसूला मनमाना किराया
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सचिन कुमार

नई दिल्ली। लुटियंस दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन का असर शुक्रवार को राजधानी की रफ्तार पर साफ दिखाई दिया। इसका प्रभाव केवल मेट्रो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सड़क यातायात, बस सेवा, इंटरनेट, ऑनलाइन भुगतान और कैब सेवाएं भी प्रभावित रहीं। कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा जांच के कारण घंटों जाम लगा रहा। मेट्रो स्टेशनों के कई प्रवेश और निकास द्वार बंद रहने से हजारों यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़े। वहीं, इंटरनेट सेवाएं प्रभावित होने से ओला, उबर और रैपिडो जैसे ऐप भी सुचारु रूप से काम नहीं कर सके। मजबूरी का फायदा उठाते हुए कई ऑटो चालकों ने सामान्य से दो-तीन गुना अधिक किराया वसूला।

सुबह आठ बजे के बाद आईटीओ, मंडी हाउस, कनॉट प्लेस, जनपथ, केंद्रीय सचिवालय और इंडिया गेट क्षेत्र के बस स्टॉप पर यात्रियों की लंबी कतारें दिखीं। मेट्रो सेवाएं प्रभावित होने से बड़ी संख्या में लोग बसों की ओर पहुंचे, लेकिन जाम के कारण बसें भी निर्धारित समय पर नहीं पहुंच सकीं। कई यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा, जबकि जो बसें आईं, उनमें भारी भीड़ थी।
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ऑनलाइन टैक्सी सेवाएं प्रभावित होने के बाद लोगों ने ऑटो का सहारा लिया, लेकिन कई चालकों ने मनमाना किराया वसूला। कनॉट प्लेस से लक्ष्मी नगर तक सामान्यतः 80 से 100 रुपये लगने वाला किराया 250 से 300 रुपये तक पहुंच गया। हालांकि कुछ ऑटो चालकों का कहना है कि सड़क बंद होने और जाम के कारण एक चक्कर पूरा करने में दोगुना समय लग रहा है, जिससे उनकी आय भी प्रभावित हुई है।

इंटरनेट सेवाएं बाधित होने का असर डिजिटल भुगतान और ऐप आधारित परिवहन सेवाओं पर भी पड़ा। कई लोग ओला, उबर और रैपिडो पर कैब बुक नहीं कर सके। ऑनलाइन भुगतान ऐप भी सुचारु रूप से नहीं चले, जिससे लोगों को नकदी का सहारा लेना पड़ा। यात्रियों का कहना है कि डिजिटल दौर में इंटरनेट ठप होने से रोजमर्रा की कई जरूरी सुविधाएं एक साथ प्रभावित हो जाती हैं।

प्रदर्शन के कारण कई मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रहे। यात्रियों को अपने निर्धारित स्टेशन के बजाय आगे उतरकर पैदल या अन्य साधनों से गंतव्य तक पहुंचना पड़ा। इससे कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और अन्य यात्रियों को घंटों की देरी का सामना करना पड़ा। लोगों का कहना है कि मेट्रो दिल्ली की लाइफलाइन है और इसके प्रभावित होने से पूरे शहर की रफ्तार थम जाती है। उनका मानना है कि जल्द समाधान निकलना चाहिए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
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लोग बोले

आज पूरा ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसे ठप हो गया था। मेट्रो बंद, बस लेट और इंटरनेट नहीं चलने से मुझे कैब भी नहीं मिली। ऑफिस पहुंचने में दो घंटे की देरी हो गई।-विक्रम

डिजिटल दौर में इंटरनेट बंद होने का मतलब है कि मेरी आधी सुविधाएं खत्म हो गईं। न ऑनलाइन भुगतान कर पाया, न टैक्सी बुक कर सका।- कुणाल

मेट्रो स्टेशन का गेट बंद मिला तो मुझे तीन स्टेशन आगे उतरना पड़ा। वहां से पैदल कॉलेज पहुंचा और पूरा शेड्यूल बिगड़ गया।-सिद्धार्थ

मेट्रो दिल्ली की लाइफलाइन है। इसके प्रभावित होने से रोजमर्रा की जिंदगी रुक जाती है। सरकार को जल्द समाधान निकालना चाहिए।- चेष्टा
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