गंगा समेत देश की सभी नदियां नालों के जाल से मुक्त होंगी। किसी भी कीमत पर नालों का शोधित/अशोधित पानी नदियों तक नहीं पहुंच सकेगा। हालांकि इस दौरान नदी के न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह को सुनिश्चित करने की जरूरत भी बताई गई।
भारत नदी सप्ताह के समापन सत्र में बृहस्पतिवार को इसका ऐलान केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने किया। कार्यक्रम का आयोजन वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड ऑडिटोरियम में किया गया। उमा भारती के मुताबिक, नदी की जगह नालों का पानी उद्योग इस्तेमाल करने से दोहरा फायदा होगा।
जहां नदियां गंदे पानी से प्रदूषित नहीं होंगी। वहीं, उद्योगों की जरूरतों के लिए नदी का दोहन भी रुकेगा। भारती ने माना कि यह आसान नहीं है। मसलन, अगर दिल्ली की यमुना नदी में नालों को रोक दिया जाए, तो नदी सूख जाएगी।
इसके लिए जरूरी है कि नदी का न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह सुनिश्चित किया जाए। सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। जल्द ही हर मौसम में अविरल व निर्मल गंगा के लिए तयशुदा कार्यक्रम की घोषणा होगी। गंगा संरक्षण के लिए मंत्रालय ने प्रधानमंत्री को 21 सूत्रीय एजेंडा भेजा है। मंजूरी मिलते ही इसका क्रियान्वयन शुरू कर दिया जाएगा।
नदी जोड़ कार्यक्रम पर सरकार की तेजी
सरकार के महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो कार्यक्रम का रीवर वीक में शामिल सभी विशेषज्ञों ने विरोध किया। कार्यक्रम के संचालक मनोज मिश्रा ने उमा भारती के सामने इस कार्यक्रम पर पुनर्विचार की मांग कर डाली। दलील यह थी कि इससे फायदे से ज्यादा नुकसान होने की आशंका है।
इसका जवाब देते हुए भारती ने कहा कि इस कार्यक्रम के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। इसकी सिफारिशें आ गई हैं। इनका अध्ययन किया जा रहा है। देश में भुखमरी व गरीबी मिटाने के लिए यह कायर्र्कम बहुत ही फायदेमंद है। फिर भी, हम पर्यावरणविदों की सलाह पर ही आगे बढ़ेंगे। सरकार किसी तरह से नदी की पारिस्थितिकी से छेड़छाड़ नहीं करेगी।
पारिस्थितिकी के अनुकूल लगेंगे पौधे
उन्होंने ने माना कि निर्र्वनीकरण से भी नदियों को बहुत नुकसान हुआ है। सरकार इस दिशा में काम कर रही है कि विकास व आस्था के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाए। नदियों के स्वरूप को ध्यान में रखकर तटों पर वनस्पतियां लगाई जाएंगी। इससे रोजगार का सृजन भी होगा।
गंगा संरक्षण कार्यक्रम पर उमा ने भेजा पीएम के पास प्रस्ताव
गंगा की अविरल धारा और निर्मलता सुनिश्चित करने के साथ ही संरक्षण को लेकर जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने 21 बिंदुओं पर विचार के लिए एक प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास भेजा है। इस पर पीएम की मुहर लगते ही सरकार की ओर से गंगा संरक्षण कार्यक्रम पर ठोस कदम उठाए जाएंगे।
बृहस्पतिवार को एक कार्यक्रम में इसका जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि गंगा की निर्मलता और अविरलता सुनिश्चित करने के लिए सरकार की ओर से जल्द समयबद्ध कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि उनका मंत्रालय यह सुनिश्चित करेगा कि गंगा में शोधित या अशोधित किसी तरह का पानी नहीं जाए। वहीं उन्होंने उद्योग जगत से अपील की है कि वे अपने इस्तेमाल के लिए नदी से पानी लेने की जगह अपने शोधित जल का ही इस्तेमाल करें।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक मौसम में नदियों में सालों भर पानी का प्रवाह बना रहे, इसे भी सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किये जाएंगे। भविष्य में बनने वाले बांधों में इस बात का विशेष ख्याल रखा जाएगा कि पानी के श्रोत वाली मूल नदी की एक अविरल धारा बनी रहे।
उन्होंने बताया कि मौजूदा बांधों को लेकर भी यह अध्ययन जारी है ताकि मूल नदी की अविरल धारा निकालना संभव हो सके। बढ़ते पर्यावरण असंतुलन पर उमा भारती ने कहा कि इसके निपटने के लिए नदियों के स्वरूप के अनुसार उनके तटों पर पेड़-पौधे लगाए जाएं।