दिल्ली हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को कच्ची नहर की अपेक्षा मुनक नहर के जरिये दिल्ली को 719 क्यूसेक पानी देने का निर्देश दिया है। अब प्रतिदिन 80 से 90 एमजीडी पानी की बचत होगी, जो कच्ची नहर के कारण बर्बाद हो जाता था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि तीन दिन में इस आदेश का पालन होना चाहिए। न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल ने हरियाणा, दिल्ली सरकार, केंद्र व दिल्ली जल बोर्ड के तर्क सुनने के बाद यह आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि हरियाणा को अपना अड़ियल रवैया छोड़ना होगा।
इस आदेश के बाद जल संकट झेल रहे द्वारका निवासियों को भी पानी मिलने का रास्ता साफ हो गया। मुनक नहर से मिलने वाला पानी द्वारका के अलावा बवाना व ओखला ट्रीटमेंट प्लांट को दिया जाएगा।
अदालत ने हरियाणा के उस तर्क को खारिज कर दिया कि दिल्ली को 610 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए था, लेकिन हम 719 क्यूसेक पानी दे रहे हैं। अदालत ने कहा ‘हम यह तय नहीं कर रहे कि कितना पानी मिलना चाहिए। हम अभी अंतरिम आदेश दे रहे हैं और किसी भी हालत में पानी को रोका नहीं जाए।’