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दंगों की आंच में झुलसी AAP, बढ़ी चुनावी टेंशन

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राजधानी के सांप्रदायिक तनाव ने ‘आप’ की सोशल इंजीनियरिंग पर संकट खड़ा कर दिया है। सिख और गरीब-निचले तबके के साथ मुस्लिम मतदाताओं की जुगलबंदी में पार्टी को सियासी फायदा दिख रहा था, लेकिन सांप्रदायिक तनाव की आशंकाओं ने नेताओं की बेचैनी बढ़ा दी है।
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पार्टी रणनीतिकार मान रहे हैं कि धार्मिक आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण ‘आप’ के लिए नुकसानदेह हो सकता है। पार्टी सूत्र बताते हैं चुनाव में संभव है कि भाजपा अरविंद केजरीवाल को मुस्लिम हितैषी साबित करने की कोशिश करे। इससे हिंदू समाज का निचले तबके का वोट खिसक सकता है।

दरअसल, पिछले विधानसभा चुनाव में ‘आप’ ने कांग्रेस के वोट में जबरदस्त सेंध लगाई थी। दिल्ली की ज्यादातर सुरक्षित सीटों पर कब्जा किया था। वहीं, दूसरी सीटों पर भी काफी संख्या में निचले तबके का वोट पार्टी के खाते में गया था।
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AAP को सकता है बड़ा नुकसान

‘आप’ की 49 दिनों की सरकार में बिजली-पानी की दरों में कटौती और भ्रष्टाचार पर रोक लगने से लोगों का यकीन बढ़ा था। इससे पार्टी चुनाव में जाना बेहतर मान रही थी।

पिछले आठ महीने से केजरीवाल समेत पूरी पार्टी विधानसभा को भंग कराने के लिए जोर लगाए थे, लेकिन पिछले एक महीने में राजधानी में बढ़े सांप्रदायिक तनावों ने ‘आप’ नेताओं के चेहरे पर शिकन ला दी है।

एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि अगर वोटों का सांप्रदायिक आधार पर ध्र्रुवीकरण होता है तो ‘आप’ को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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ये तीन मिलें तभी बचेगी दिल्ली!

खास बात यह कि इस मामले में पार्टी शांति की अपील भर कर सकती है। हालांकि पार्टी के रणनीतिकारों को सबसे कारगर तरीका लग रहा है कि इस मामले में भाजपा की भूमिका को कटघरे में खड़ा किया।

यही वजह रही कि केजरीवाल ने सोमवार सुबह भाजपा पर हमला बोला। ट्विट पर केजरीवाल ने लिखा कि भाजपा दिल्ली में तनाव-दंगे फैलाने की कोशिश कर रही।

त्रिलोकपुरी, नंदनगरी, बवाना, अब मुंडका। जनता, मीडिया और पुलिस मिलकर ही दिल्ली को बचा सकते हैं। सूचना के मुताबिक, दिल्ली गांव देहात के लोग भाजपा की नफरत की राजनीति को नकार रहे हैं।
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