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दिल्ली विधानसभा भंग करने को हरी झंडी

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दिल्ली विधानसभा को भंग करने की मंजूरी दे दी गई है। प्रधानमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया है, जिसे दिल्ली के एलजी ने तीनों दलों से चर्चा के बाद उन्हें सौंपा था।
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सोमवार को एलजी ने दिल्ली के तीनों प्रमुख दलों से चर्चा के बाद राष्ट्रपति से दिल्ली विधानसभा भंग करने की सिफारिश की थी। कैबिनेट ने उसी सिफारिश को मंजूरी देते हुए दिल्ली विधानसभा भंग करने का ऐलान किया। बैठक के बाद दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्यक्ष और भाजपा दिल्ली के प्रभारी प्रभात झा ने इसकी जानकारी दी।

अब दिल्ली में विधानसभा चुनाव के सभी रास्ते साफ हो गए। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के मुताबिक दिल्ली में चुनाव होने की स्थिति में इसे फरवरी से पहले निपटा लेना होगा। ऐसे में बहुत मुमकिन है कि जल्द ही दिल्ली विधानसभा चुनावों की तारीखें घोषित कर दी जाएं। हालांकि इस पर आखिरी फैसला निर्वाचन आयोग होगा।
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गौरतलब है कि नवंबर-जनवरी में जम्मु-कश्मीर और झारंखड में चुनाव होने हैं। सूत्रों की मानें तो चुनाव आयोग दिल्ली में भी उसी दौरान चुनाव निपटाने का फैसला कर सकता है।

हरियाणा और महाराष्ट्र के तर्ज पर चुनाव लड़ेगी भाजपा

केंद्रीय कैबिनेट की ओर से दिल्ली में विधानसभा भंग किए जाने को मंजूरी दिए जाने के बाद भाजपा तत्काल चुनावी मोड में आ गई है। भाजपा ने अभी से यह घोषाण कर दी है कि वह दिल्ली में भी हरियाणा और महाराष्ट्र की तर्ज पर चुनाव लड़ेगी। यानि दिल्ली में पार्टी किसी मुख्यमंत्री उम्मीदवार की घोषणा नहीं करेगी।

कैबिनेट के फैसले बाद दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने साफ किया कि यहां भी पार्टी सामुहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी, न कि किसी एक चेहरे को आगे कर के। उनके मुताबिक दिल्ली में पार्टी को मोदी लहर को फायदा होगा और भाजपा चुनाव जीतने में सफल रहेगी।

उधर, आप प्रवक्ता आशुतोष ने कैबिनेट के फैसले पर खुशी जताते कहा‌ कि यह फैसला पहले ही कर देना चा‌हिए था। जबकि कांग्रेस नेता हारुन युसुफ ने कैबिनेट के फैसले का स्वागत करते हुए पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरनी की बात कही है।

अभी चुनाव होने पर किसका पलड़ा है भारी

दिल्ली में कुल 70 विधानसभा सीटें हैं और सात लोकसभा सीट। हालिया लोकसभा चुनावों भाजपा ने दिल्ली की सातों सीटों पर जीत ली थीं। वहीं, आम आदमी पार्टी सभी सात सीटों पर दूसरे नंबर पर रही थी।

हालांकि आप और कांग्रेस का कहना है कि लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में फर्क होता है। लेकिन 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 68 सीटों पर चुनाव लड़ा था। जिसमें 31 पर उसने जीत दर्ज की। 2 पर उसकी जमानत जब्त हो गई और कुल पड़े वोट के 33 फीसदी वोट उसके हिस्से में आये। भाजपा के दल शिरोमणि अकाली दल 2 सीटों पर लड़ी, जिसमें एक में उसे जी मिली।

इस लिहाज से भी फिलहाल भाजपा का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। उधर, हरियाणा और महाराष्ट्र में अप्रत्याशित जीत से पार्टी का मनोबल और बढ़ा हुआ है। माना जा रहा है कि हालिया जीत को ध्यान में रखकर ही पार्टी ने चुनाव में जाने का फैसला किया है।
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क्या है तीनों पार्टियों का रुख

सोमवार को दिल्ली की सभी पार्टियों ने बारी-बारी से एलजी से मुलाकत कर अपनी राय बता दी थी। सबसे पहले भाजपा नेता जगदीश मुखी ने एलजी से मुलाकात कर दिल्ली में सरकार बनाने में अक्षमता जाहिर की। हालांकि भाजपा अध्यक्ष ने अपनी मंशा सार्वजनिक नहीं की। उनके मुताबिक वह अपनी बात एलजी को स्पष्ट कर चुके हैं। उधर, पार्टी के एक दिग्गज नेता ने यहां तक कहा कि दिल्ली में उनकी जीत पक्की है।

इसके बाद कांग्रेस नेता हारुन युसुफ ने एलजी से मुलाकत की और दिल्ली में विधानसभा चुनाव कराने की मांग की। युसुफ के मुताबिक कांग्रेस शुरू से ही दिल्ली में चुनाव की पक्षधर है।

सबसे बाद में आम आदमी पार्टी ने एलजी से मुलाकात की। कुछ देर के लिए आप प्रमुख के ट्वीट से यह संशय भी बना रहा कि आप दोबारा सरकार बनाने की कवायद में जुटी है, लेकिन मुलाकात के बाद आप नेता सिसोदिया ने पार्टी की राय बता दी।

सिसोदिया के मुताबिक भाजपा को अपनी बात दोबारा बोलने में आठ महीने लगे। फिलहाल उनकी पार्टी दिल्ली में फिर से चुनाव चाहती है। सिसोदिया ने यह भी बताया कि उनकी पार्टी ने एलजी से जम्मु-कश्मीर और झारखंड चुनावों के साथ दिल्ली में भी चुनाव कराने की अपील की है।
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