फाल्गुन शुक्ला पूर्णिमा में प्रदोष के समय होलिका दहन का विधान है। धर्मशास्त्रों में दिन में, चतुर्दशी में, प्रतिपदा एवं भद्राकाल में होलिका दहन निषिद्ध है।
यदि पूर्णिमा दो दिन प्रदोषकाल को व्याप्त कर रही हो तो दूसरे दिन ही प्रदोष काल में होलिका दहन किया जाता है। यह जानकारी अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद के महासचिव आचार्य कृष्णदत्त शास्त्री ने दी।
उनका कहना है कि इस वर्ष फाल्गुन शुक्ला पूर्णिमा का मान 27 घटी 50 पल हैं और अगले दिन बृहस्पतिवार को प्रतिपदा का मान 34 घटी 10 पल है। यहां प्रतिपदा का मान पूर्णिमा से अधिक है।
इस कारण परवर्ती तिथि प्रतिपदा वृद्धगामिनि हुई। इस परिस्थिति में ‘भविष्योत्तर पुराण‘ का निर्णय है कि दूसरे दिन पूर्णिमा के उस अंतिम भाग में जहां वह सायंकाल (दिन के पंचम पंचमास) को व्याप्त कर रही हो तो होलिका दहन कर लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष फाल्गुन शुक्ला पूर्णिमा बुधवार 23 मार्च को है प्रदोष काल में सायं 5 बजकर 30 मिनट से 6 बजे तक होलिका दहन निशंक रूप से सारे देश में किया जाएगा। वहीं 24 मार्च को होलिका धूलि धारण, धुलैंडी, होला महोत्सव परम्परानुसार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।